आयकर विभाग (Income Tax Department) ने वित्त वर्ष 2024-25 की ITR फाइलिंग की अंतिम तारीख 15 सितंबर से बढ़ाकर 16 सितंबर कर दी। लेकिन करदाताओं को राहत देने के बावजूद, आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल की तकनीकी दिक्कतें जारी हैं, जिससे सोशल मीडिया पर गुस्सा और निराशा साफ झलक रही है।
मुख्य तथ्य
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन बढ़कर 16 सितंबर 2025 कर दी गई।
- करदाता अभी भी पोर्टल की गड़बड़ियों से जूझ रहे हैं।
- कई यूज़र्स ने X (ट्विटर) पर अपनी शिकायतें दर्ज कीं।
- सेक्शन 234F के तहत लेट फीस की गलत एंट्री दिखने की शिकायतें।
- आयकर विभाग ने ब्राउज़र और सिस्टम सेटिंग से जुड़े “क्विक फिक्स” सुझाए।
आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ITR फाइलिंग की अंतिम तारीख को 15 सितंबर से बढ़ाकर 16 सितंबर कर दिया। यह घोषणा वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर की रात 11:48 बजे X (ट्विटर) पर की। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ई-फाइलिंग पोर्टल रात 12:00 बजे से सुबह 2:30 बजे तक मेंटेनेंस पर रहेगा, ताकि आवश्यक तकनीकी बदलाव किए जा सकें।
हालांकि, इस एक दिन की बढ़ोतरी से करदाताओं को उम्मीद थी कि वे बिना लेट फीस के अपनी रिटर्न जमा कर पाएंगे, लेकिन पोर्टल की गड़बड़ियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। कई करदाताओं ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि पोर्टल समय पर ठीक नहीं हुआ और रिटर्न अपलोड करने में लगातार समस्याएं आ रही हैं।
करदाताओं की शिकायतें
एक यूज़र रवि कुमार ने X पर लिखा—“मेंटेनेंस के बाद भी पोर्टल काम नहीं कर रहा। फिर एक्सटेंशन का क्या फायदा?”
वहीं, अजीत झा नामक यूज़र ने बताया कि रिटर्न अपलोड करते समय सेक्शन 234F के तहत लेट फीस की एंट्री दिखाई दे रही है, जबकि उन्होंने समय पर फाइलिंग की कोशिश की।
एडवोकेट सौरभ गुप्ता ने गुस्से में लिखा—“HELP THE PROFESSIONALS, DON’T HARASS THEM. पोर्टल वैसा ही है जैसा कल था। एक्सटेंशन का क्या लाभ?”
चार्टर्ड अकाउंटेंट हिमांक सिंगला ने भी पोर्टल डाउन होने की शिकायत दर्ज कराई।
आयकर विभाग के सुझाए गए “क्विक फिक्स”
सोमवार शाम को आयकर विभाग ने अपने आधिकारिक X हैंडल से करदाताओं के लिए कुछ “क्विक फिक्स” साझा किए। इनमें ब्राउज़र कैश और कुकीज़ साफ करना, अलग ब्राउज़र (क्रोम/एज) का उपयोग करना, इन्कॉग्निटो मोड खोलना, एक्सटेंशन डिसेबल करना और नेटवर्क बदलकर आज़माना शामिल है। विभाग का कहना है कि कई समस्याएं यूज़र की लोकल सिस्टम सेटिंग्स के कारण भी हो सकती हैं।
देर से ITR फाइलिंग का नुकसान
डेलॉइट इंडिया की पार्टनर आरती राओटे ने चेतावनी दी कि यदि रिटर्न समयसीमा के बाद दाखिल किया जाता है तो कई वित्तीय नुकसान हो सकते हैं।
- देर से फाइलिंग पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना।
- बकाया टैक्स पर हर महीने 1% ब्याज।
- मौजूदा साल के नुकसान (जैसे कैपिटल लॉस) को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का मौका नहीं मिलेगा।
- करदाता अपने लिए अनुकूल टैक्स रेजीम चुनने का अधिकार खो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देर से फाइलिंग पर रिफंड में देरी हो सकती है और करदाताओं को आयकर विभाग से नोटिस या जांच का जोखिम भी झेलना पड़ सकता है।


