EPFO के बड़े फैसले: आंशिक निकासी के नियम आसान, अब तीन श्रेणियों में निकासी की सुविधा

EPFO ने अपने 30 करोड़ सदस्यों के लिए निकासी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सदस्य केवल तीन श्रेणियों — आवश्यक जरूरतें, आवास और विशेष परिस्थितियों — में फंड निकाल सकेंगे।

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EPFO निकासी नियमों में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ 3 श्रेणियाँ

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने करोड़ों सदस्यों को बड़ी राहत दी है। सोमवार को हुई 238वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (CBT) बैठक में फंड निकासी के नियमों को सरल करते हुए केवल तीन श्रेणियों में बांट दिया गया है। अब शिक्षा और शादी के लिए निकासी की सीमा भी बढ़ाई गई है, जबकि “विशेष परिस्थितियों” में बिना कारण बताए निकासी की अनुमति मिलेगी।

मुख्य तथ्य

  • अब EPF निकासी तीन श्रेणियों में — आवश्यक जरूरतें, आवास और विशेष परिस्थितियाँ।
  • शादी के लिए अब 5 बार और शिक्षा के लिए 10 बार निकासी की अनुमति।
  • विशेष परिस्थितियों में अब कारण बताना जरूरी नहीं।
  • खाते में 25% न्यूनतम बैलेंस रखना अनिवार्य।
  • EPFO 3.0 के तहत डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन फ्रेमवर्क को भी मंजूरी।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सोमवार को अपने 238वें सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (CBT) की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिनसे 30 करोड़ से अधिक कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। बैठक की अध्यक्षता श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने की।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब फंड निकासी को केवल तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा जाएगा —

  1. आवश्यक जरूरतें: बीमारी, शिक्षा, और विवाह जैसे कारण।
  2. आवास संबंधी जरूरतें: घर की खरीद या निर्माण के लिए।
  3. विशेष परिस्थितियाँ: ऐसी परिस्थितियाँ जिनमें कारण बताने की जरूरत नहीं होगी।

पहले शिक्षा और विवाह के लिए केवल तीन बार आंशिक निकासी की अनुमति थी, लेकिन अब शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार निकासी की सुविधा दी गई है।

न्यूनतम बैलेंस और ब्याज लाभ

EPFO ने यह भी स्पष्ट किया कि हर सदस्य को अपने खाते में कम से कम 25% राशि न्यूनतम बैलेंस के रूप में बनाए रखनी होगी। मंत्रालय ने कहा,

“यह सुनिश्चित करेगा कि सदस्यों को 8.25% की उच्च ब्याज दर का लाभ निरंतर मिले और वे लंबे समय में बेहतर सेवानिवृत्ति कोष बना सकें।”

इस बदलाव से न केवल निकासी प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि “ऑटो सेटलमेंट सिस्टम” के तहत अब आंशिक निकासी के दावे 100% स्वचालित रूप से निपटाए जा सकेंगे। इससे सदस्यों को किसी दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी।

EPFO 3.0 का आगाज़

बैठक में EPFO 3.0 के तहत डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दी गई। इसके अंतर्गत कोर बैंकिंग सॉल्यूशन, क्लाउड-नेटिव सिस्टम, API-आधारित सेवाएं और ERP इंटीग्रेशन को लागू किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार,

“इससे क्लेम प्रोसेसिंग, निकासी, पेरोल लिंकिंग और सदस्य सेवाएं पूरी तरह डिजिटल, तेज़ और बहुभाषी होंगी।”

RBI की सिफारिशों पर समिति गठित होगी

EPFO अब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की सिफारिशों पर विचार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करेगा। समिति में आंतरिक और बाहरी डोमेन विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति EPFO के फंड प्रबंधन और निवेश नीति पर रिपोर्ट तैयार करेगी, जो साल के अंत तक बोर्ड में चर्चा के लिए लाई जाएगी।

RBI ने अपनी रिपोर्ट में EPFO को सलाह दी थी कि वह अपनी निवेश रणनीति में विविधता लाए और इक्विटी (शेयर बाजार) में निवेश धीरे-धीरे बढ़ाए ताकि रिटर्न में सुधार और जोखिम में संतुलन कायम रखा जा सके।

वर्तमान में, EPFO अपने फंड का लगभग 15% इक्विटी, 45–65% सरकारी बॉन्ड और 20–45% कॉर्पोरेट डेट में निवेश करता है। RBI ने सुझाव दिया है कि कॉर्पोरेट बॉन्ड निवेश के लिए न्यूनतम सीमा को हटाया जाए ताकि फंड प्रबंधन अधिक लचीला हो सके।

नए फंड मैनेजरों को मंजूरी

CBT ने EPFO के ऋण पोर्टफोलियो को संभालने के लिए चार नई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को मंजूरी दी है —
SBI Funds Management Ltd, HDFC AMC Ltd, Aditya Birla Sun Life AMC Ltd, और UTI AMC Ltd
इन कंपनियों को पांच वर्षों के लिए फंड मैनेजमेंट का जिम्मा सौंपा गया है।

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