धुरंधर: असल ज़िंदगी का रहमान डकैत कौन था?

15 की उम्र में मां की हत्या, 21 में लयारी का ‘बादशाह’ और एनकाउंटर के बाद क्या हुआ

newsdaynight
newsdaynight
6 Min Read
धुरंधर का रहमान डकैत: असली कहानी और एनकाउंटर

आदित्य धर की फिल्म धुरंधर इन दिनों सिनेमाघरों में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रही है। फिल्म में अक्षय खन्ना द्वारा निभाया गया किरदार रहमान डकैत दर्शकों के बीच खास चर्चा में है। यह किरदार काल्पनिक नहीं, बल्कि कराची के कुख्यात अपराधी रहमान डकैत की असल ज़िंदगी से प्रेरित है, जिसकी कहानी फिल्म से भी ज़्यादा खौफनाक और विचलित करने वाली रही है।

मुख्य तथ्य

  • रहमान डकैत का असली नाम अब्दुल रहमान बलोच, जन्म 1976, कराची
  • 13 साल की उम्र में पहली हिंसक वारदात, 15 में मां की हत्या
  • 21 की उम्र तक लयारी का सबसे ताकतवर गैंग लीडर
  • 80 से अधिक हत्या-अपहरण मामलों में वांछित
  • 2009 में पुलिस एनकाउंटर में मौत, एनकाउंटर पर आज भी सवाल

लयारी की गलियों से अपराध की दुनिया तक

रहमान डकैत का जन्म 1976 में कराची के लयारी इलाके में हुआ। यह इलाका लंबे समय से गरीबी, गैंगवार और अपराध-पुलिस गठजोड़ के लिए जाना जाता रहा है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, उसके पिता दाद मोहम्मद खुद नशे के कारोबार से जुड़े थे और प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से उनका सीधा टकराव रहता था। लयारी में उस दौर में अपराध सिर्फ ज़रूरत नहीं, बल्कि सत्ता का रास्ता था।

पूर्व लयारी एसपी फैयाज़ खान के अनुसार, “लयारी में गिरोहों के बीच इलाकों को लेकर खूनी संघर्ष आम बात थी।” इन्हीं झगड़ों में रहमान के चाचा ताज मोहम्मद की हत्या हुई, जिसने किशोर रहमान के भीतर हिंसा की आग को और भड़का दिया।

13 साल में चाकूबाज़ी, 15 में मां की हत्या

रहमान का अपराध की दुनिया में प्रवेश बेहद कम उम्र में हो गया। महज़ 13 साल की उम्र में उसने एक व्यक्ति पर चाकू से हमला किया, क्योंकि उसने पटाखे फोड़ने से रोका था। दो साल बाद उसने दो प्रतिद्वंद्वी ड्रग तस्करों की हत्या कर दी।

सबसे चौंकाने वाली घटना 1995 में सामने आई, जब रहमान ने अपनी ही मां खदीजा की घर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस को दिए बयान में उसने दावा किया कि उसकी मां पुलिस मुखबिर बन गई थीं, लेकिन व्यापक तौर पर माना गया कि उसे शक था कि मां का संबंध प्रतिद्वंद्वी गिरोह के सदस्य से है। यही दृश्य फिल्म धुरंधर में भी दिखाया गया है।

गिरफ्तारी, फरारी और सत्ता की चढ़ाई

मां की हत्या के बाद रहमान को हथियार और ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उसने करीब ढाई साल जेल में बिताए, लेकिन अदालत ले जाते समय पुलिस हिरासत से फरार हो गया। वह बलूचिस्तान भाग गया और वहीं से अपने साम्राज्य की नींव रखी।

धुरंधर का रहमान डकैत
धुरंधर का रहमान डकैत

2006 तक रहमान अकूत संपत्ति, हथियारों और सैकड़ों शूटरों के साथ लयारी का सबसे ताकतवर व्यक्ति बन चुका था। उसकी तीन शादियां, 13 बच्चे और पाकिस्तान के बाहर ईरान तक संपत्तियों की चर्चा थी। वह अब सिर्फ अपराधी नहीं, बल्कि खुद को “सरदार अब्दुल रहमान बलोच” कहलाने लगा था।

लयारी गैंगवार: हज़ारों मौतें

रहमान और हाजी लल्लू पहले साथ मिलकर नशा और जुए का कारोबार चलाते थे, लेकिन बाद में दोनों में दुश्मनी हो गई। इसके बाद लयारी में ऐसी हिंसा फैली कि अनुमान के अनुसार 3,500 से अधिक लोग मारे गए
पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, “करीब एक दशक तक लयारी में आम ज़िंदगी ठप रही। अपहरण, वसूली, अवैध हथियारों और ड्रग्स का कारोबार चरम पर था।”

इसी दौरान रहमान ने पीपल्स अमन कमेटी बनाई और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पाल लीं। वह सिर्फ अंडरवर्ल्ड डॉन नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति केंद्र बनना चाहता था।

लयारी टास्क फोर्स और चौधरी असलम

2006 में लयारी टास्क फोर्स बनाई गई, जिसकी कमान थी कुख्यात एनकाउंटर स्पेशलिस्ट चौधरी असलम के हाथों में। फिल्म धुरंधर  में यह किरदार संजय दत्त निभाते हैं।
उसी साल रहमान को पकड़ा गया, लेकिन गिरफ्तारी कभी आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं हुई। बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद उसे “एनकाउंटर न करने” का निर्देश मिला और वह पुलिस निगरानी से फरार हो गया।

असल में कैसे मारा गया रहमान डकैत

2009 में पुलिस ने फोन डेटा के आधार पर रहमान की लोकेशन ट्रैक की। दावा है कि उसे क्वेटा के पास पकड़ा गया। जब उसे वरिष्ठ अधिकारी से बात करने को कहा गया, तो सामने खुद चौधरी असलम बैठे थे।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, रहमान ने पैसे देकर मामला निपटाने की कोशिश की, लेकिन असलम ने मना कर दिया। इसके कुछ समय बाद रहमान डकैत और उसके तीन साथी एनकाउंटर में मारे गए

पुलिस ने कहा कि वह 80 से अधिक संगीन मामलों में वांछित था। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली बहुत नज़दीक से मारे जाने के संकेत मिले, जिससे एनकाउंटर की प्रामाणिकता पर सवाल उठे।

एनकाउंटर के बाद क्या हुआ?

धुरंधर का पहला भाग यहीं खत्म होता है, लेकिन धुरंधर 2 की कहानी यहीं से शुरू होगी। रहमान को लयारी के इतिहास का सबसे बड़ा जनाज़ा मिला। उसकी पत्नी ने सिंध हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एनकाउंटर को फर्जी बताया। अदालत ने रिपोर्ट मांगी, लेकिन मामला कभी अपने अंजाम तक नहीं पहुंचा।

2014 में वही चौधरी असलम तालिबान के आत्मघाती हमले में मारे गए। इस तरह लयारी की हिंसक गाथा का एक और अध्याय बंद हुआ, लेकिन सवाल आज भी ज़िंदा हैं।

Share This Article
Leave a Comment