भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच मई में हुई सैन्य कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की आधिकारिक स्वीकारोक्ति सामने आई है। पहली बार पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से माना है कि भारतीय हमलों से उसके एक अहम सैन्य ठिकाने को नुकसान पहुंचा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी हुई है।
मुख्य तथ्य
- पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने भारत के हमले की पुष्टि की
- नूर खान एयरबेस, चकलाला (रावलपिंडी) को नुकसान पहुंचने की बात कही गई
- हमले में सैन्य प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हुए और कर्मी घायल हुए
- कार्रवाई मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई
- यह बयान वर्षांत प्रेस ब्रीफिंग में दिया गया
क्या स्वीकार किया पाकिस्तान ने
पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक़ डार ने वर्ष के अंत में हुई प्रेस ब्रीफिंग में स्वीकार किया कि भारत ने मई में पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया था। उनके अनुसार, भारत ने सीमित समय में कई ड्रोन भेजे, जिनमें से एक ड्रोन ने सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाया और वहां तैनात कर्मी घायल हुए।
डार ने कहा कि लगभग 36 घंटे में करीब 80 ड्रोन पाकिस्तान की ओर भेजे गए, जिनमें से 79 को रोक लिया गया, लेकिन एक ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंच गया। यह बयान पाकिस्तान के उस पुराने रुख से अलग है, जिसमें वह आमतौर पर भारतीय सैन्य कार्रवाई से इनकार करता रहा है।
पृष्ठभूमि: ऑपरेशन सिंदूर क्यों हुआ
यह घटनाक्रम अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सामने आया था, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने मई की शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
भारत की इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया, जिसमें पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी और भारत की ओर से जवाबी कदम देखे गए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नूर खान एयरबेस पर हमले की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होती रही, लेकिन पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
हमले का असर और सैन्य संकेत
इशाक़ डार के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि नूर खान एयरबेस को वास्तविक नुकसान हुआ। यह एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना का एक महत्वपूर्ण ठिकाना माना जाता है। बाद में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में भी इस एयरबेस समेत पाकिस्तान के अन्य सैन्य ठिकानों पर क्षति के संकेत दिखे।
इन तस्वीरों में नूर खान एयरबेस के अलावा सरगोधा स्थित मुशाफ एयरबेस, भोलारी एयरबेस और जैकबाबाद के शाहबाज़ एयरबेस में भी नुकसान देखा गया। यह जानकारी उस समय और मजबूत हुई, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी मई में स्वीकार किया कि भारतीय मिसाइलें कुछ सैन्य ठिकानों तक पहुंची थीं।
BIG BREAKING– Pakistan FM Ishaq Dar's big admission
Dar admits India destroyed Noor Khan airbase during Operation Sindoor
Follow Republic for LIVE breaking news- https://t.co/glzTV1oVNw#OperationSindoor #NoorKhan #NoorKhanairbase #IshaqDar pic.twitter.com/Ohexl8lS5o
— Republic (@republic) December 28, 2025
संघर्षविराम और आगे की स्थिति
भारत की कार्रवाई और उसके बाद बढ़े तनाव के बीच एक अहम मोड़ तब आया, जब पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ से संपर्क कर संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को भारत ने स्वीकार किया, जिसकी पुष्टि भारत के विदेश सचिव Vikram Misri ने की।
दोनों देशों ने जमीन, हवा और समुद्र में सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई। इशाक़ डार के ताज़ा बयान को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जहां पाकिस्तान की ओर से पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया गया कि भारत की सैन्य कार्रवाई से उसे वास्तविक नुकसान हुआ।
Q&A Section
Q1: पाकिस्तान ने नूर खान एयरबेस पर हमले को क्यों स्वीकार किया?
यह स्वीकारोक्ति वर्षांत ब्रीफिंग में सामने आई, जहां पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने ड्रोन हमलों और सैन्य नुकसान की बात कही।
Q2: इस बयान का भारत-पाक रिश्तों पर क्या संकेत है?
यह बयान मई में हुई सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करता है और उस तनावपूर्ण दौर को रेखांकित करता है, जिसके बाद दोनों देशों ने संघर्षविराम पर सहमति बनाई।


