भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए सैन्य टकराव को लेकर अब पाकिस्तान की ओर से खुलासे सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्हें बंकर में शरण लेने की सलाह दी गई थी। यह बयान उस समय आया है, जब पाकिस्तान पहले ही भारतीय हमलों से हुए नुकसान को लेकर दबाव में है।
मुख्य तथ्य
- ऑपरेशन सिंदूर 7 मई को शुरू हुआ और 10 मई तक चला
- जरदारी को उनके सैन्य सचिव ने बंकर में जाने की सलाह दी
- भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और आतंकी शिविरों पर हमले किए
- ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ
- दोनों देशों के DGMO स्तर की बातचीत के बाद युद्धविराम हुआ
क्या कहा पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शनिवार को खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी।
उन्होंने बताया कि उनके सैन्य सचिव स्वयं उनके पास आए और कहा कि युद्ध शुरू हो चुका है और सुरक्षा कारणों से बंकर में चलना चाहिए।
Asif Ali Zardari said the Pakistani military hid in bunkers during Operation Sindoor and that he too was advised to do the same.pic.twitter.com/kMpUanKQGi
— IndiaWarMonitor (@IndiaWarMonitor) December 28, 2025
जरदारी के अनुसार, उन्होंने इस सलाह को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि अगर शहादत लिखी है तो वह वहीं होगी, क्योंकि नेताओं की मौत बंकरों में नहीं बल्कि मैदान में होती है।
उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान पहले ही भारतीय हमलों को लेकर अपने ही बयानों में उलझता दिख रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 26 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी।
इस हमले में आतंकवादियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ढांचों और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले शुरू किए।
यह अभियान चार दिनों तक चला। भारत की ओर से इसे सीमित, लक्षित और रणनीतिक कार्रवाई बताया गया।
10 मई को दोनों देशों के सैन्य अभियानों के महानिदेशकों के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।
पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमले
इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
भारतीय वायुसेना ने दावा किया कि इस संघर्ष में पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान और एक बड़ा विमान मार गिराया गया।
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने भी बाद में स्वीकार किया कि भारत ने रावलपिंडी स्थित नूर खान एयर बेस पर हमला किया था।
उनके अनुसार, इस हमले में सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा और वहां तैनात कर्मी घायल हुए।
डार ने यह भी कहा कि भारत की ओर से 80 ड्रोन भेजे गए थे, जिनमें से एक ड्रोन सैन्य ठिकाने को नुकसान पहुंचाने में सफल रहा।
पाकिस्तानी दावों पर भारत की प्रतिक्रिया
पाकिस्तानी विदेश मंत्री के इन दावों पर भारत की ओर से सवाल उठाए गए।
भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी KJS Dhillon ने कहा कि पाकिस्तान के बयान वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते।
उन्होंने कहा कि नूर खान एयर बेस भारतीय हमलों के बाद आग की लपटों में घिरा हुआ था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नुकसान कहीं अधिक गंभीर था।
उन्होंने पाकिस्तान के इस दावे को भी खारिज किया कि केवल एक ड्रोन से हमला हुआ था।
उनके अनुसार, पाकिस्तान में 138 कर्मियों को मरणोपरांत सम्मानित किया गया, जो यह संकेत देता है कि भारतीय हमले का प्रभाव काफी बड़ा था।
इस कबूलनामे का महत्व
जरदारी का यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान आमतौर पर भारतीय सैन्य कार्रवाइयों को लेकर इनकार की नीति अपनाता रहा है।
राष्ट्रपति स्तर से यह स्वीकार करना कि उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी, यह दर्शाता है कि हालात कितने गंभीर थे।
यह बयान पाकिस्तान के भीतर भी राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
साथ ही, यह भारत के उस दावे को भी मजबूती देता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किए गए हमले सटीक और प्रभावी थे।
Q&A Section
प्रश्न 1: जरदारी को बंकर में जाने की सलाह क्यों दी गई थी?
क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए थे और सुरक्षा खतरा बढ़ गया था।
प्रश्न 2: जरदारी के इस बयान को अहम क्यों माना जा रहा है?
क्योंकि यह पहली बार है जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि हालात इतने गंभीर थे कि बंकर में जाने की जरूरत महसूस हुई।


