भारत और श्रीलंका के बीच खेली गई पांच मैचों की टी20 सीरीज़ का अंत भारतीय टीम ने उसी अंदाज़ में किया, जैसा पूरे दौरे में दिखा—नियंत्रण, धैर्य और सही समय पर आक्रामकता। तिरुवनंतपुरम में खेले गए आखिरी मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 15 रन से हराकर 5–0 से सीरीज़ अपने नाम कर ली।
इस बार जीत की कहानी सिर्फ टॉप ऑर्डर की नहीं थी। मुश्किल हालात में कप्तान हरमनप्रीत कौर की पारी और अंत में गेंदबाज़ों की सटीक रणनीति ने भारत को क्लीन स्वीप तक पहुंचाया।
हरमनप्रीत की अकेली लेकिन निर्णायक लड़ाई
भारत की शुरुआत इस मैच में लड़खड़ाई। शैफाली वर्मा जल्दी आउट हो गईं, डेब्यू कर रहीं जी कमलिनी और हरलीन देओल भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। 10 ओवर के बाद भारत का स्कोर 74/4 था और रन रेट दबाव में था।
ऐसे समय पर हरमनप्रीत कौर ने जिम्मेदारी संभाली। पांचवें ओवर में बल्लेबाज़ी के लिए आईं कप्तान ने 43 गेंदों में 68 रन बनाए। उनकी पारी में टाइमिंग और शॉट सेलेक्शन साफ नजर आया—चाहे फ्रंट फुट ड्राइव हों या बैक फुट पुल।
इनोक़ा रणावीरा के एक ओवर में 11 रन लेकर उन्होंने रनगति को दोबारा पटरी पर लाया। हरमनप्रीत ने 9 चौके और एक छक्का लगाया और ग्रीनफील्ड स्टेडियम के हर हिस्से में रन बटोरे।
आखिरी ओवरों में मिला जरूरी उछाल
हरमनप्रीत और अमनजोत कौर के बीच 38 गेंदों में 61 रन की साझेदारी अहम रही। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद अरुंधति रेड्डी ने बिना समय गंवाए रन बनाए। उन्होंने 11 गेंदों पर नाबाद 27 रन बनाकर भारत को 20 ओवर में 175/7 तक पहुंचाया—एक ऐसा स्कोर जिसे बचाया जा सकता था।
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श्रीलंका की शुरुआत, फिर दबाव
176 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका को शुरुआती झटका जल्दी लग गया। कप्तान चमारी अथापत्तू सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गईं। पूरी सीरीज़ में उनका बल्ला खामोश ही रहा और पांच मैचों में वह सिर्फ 103 रन बना सकीं।
इसके बाद हसिनी परेरा और इमेशा दुलानी ने पारी संभाली। दोनों ने जोखिम कम लिया और रन रोटेशन पर ध्यान दिया। 10 ओवर में श्रीलंका का स्कोर 75/1 था, लेकिन जरूरी रन रेट धीरे-धीरे बढ़ने लगा।
दुलानी ने अर्धशतक जरूर पूरा किया, लेकिन अगला ओवर उनके लिए आखिरी साबित हुआ। अमनजोत कौर को उनका विकेट मिला। इसके बाद दबाव परेरा पर आ गया।
गेंदबाज़ों ने खत्म की उम्मीद
दीप्ति शर्मा ने निलाक्षिका सिल्वा को एलबीडब्ल्यू आउट कर टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज़ बनने का रिकॉर्ड बनाया। 30 गेंदों में 64 रन की जरूरत के बीच हसिनी परेरा का आउट होना निर्णायक मोड़ साबित हुआ। 65 रन बनाकर उनके आउट होते ही श्रीलंका की उम्मीदें भी खत्म हो गईं।
भारतीय गेंदबाज़ों ने आखिरी ओवरों में लाइन और लेंथ नहीं छोड़ी और श्रीलंका को 15 रन पीछे रोक दिया।
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सीरीज़ का सार
इस मैच ने दिखा दिया कि भारत सिर्फ मजबूत शुरुआत पर निर्भर नहीं है। जब हालात मुश्किल होते हैं, तो टीम के पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो जिम्मेदारी लेते हैं। हरमनप्रीत कौर की यह पारी उसी भरोसे की तस्वीर थी—कप्तान के तौर पर भी और बल्लेबाज़ के तौर पर भी।


