दिग्गज निवेशक Warren Buffett का बर्कशायर हैथवे के CEO के रूप में 60 साल का लंबा सफर अब औपचारिक रूप से खत्म हो गया है। कंपनी की कमान अब उनके उत्तराधिकारी ग्रेग एबेल संभालेंगे। लेकिन बफेट अपने साथ सिर्फ एक 1.2 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस एम्पायर ही नहीं, बल्कि दशकों की सीख और करियर से जुड़ी सलाहों की विरासत भी छोड़ गए हैं।
इन्हीं सलाहों में से एक बात आज फिर चर्चा में है, जो बफेट ने साल 2004 की बर्कशायर हैथवे की एनुअल शेयरहोल्डर मीटिंग में कही थी। उस वक्त कैलिफोर्निया के 14 साल के एक शेयरहोल्डर जस्टिन फोंग ने उनसे पूछा था कि सफलता के लिए वे किसी युवा को क्या सलाह देंगे।
बफेट का जवाब बेहद सीधा, लेकिन गहरे असर वाला था। उन्होंने कहा,
“खुद से बेहतर लोगों के साथ वक्त बिताना ज्यादा अच्छा होता है। ऐसे साथियों को चुनिए जिनका व्यवहार आपसे बेहतर हो, आप धीरे-धीरे उसी दिशा में बढ़ने लगेंगे।”
‘बेहतर लोगों’ के साथ रहना क्यों जरूरी
बफेट की यह बात आम तौर पर कही जाने वाली उस सलाह से आगे जाती है, जिसमें कहा जाता है कि ऐसे लोगों के साथ रहो जिन्हें आप पसंद करते हैं या जिनकी आप इज्जत करते हैं। बफेट का जोर इस बात पर था कि करियर की शुरुआत में युवाओं को ऐसे लोगों के करीब रहना चाहिए, जो उनसे आगे हों—चाहे सोच में, काम के तरीके में या मूल्यों में।
बर्कशायर हैथवे के पूर्व वाइस चेयरमैन और बफेट के लंबे समय के सहयोगी रहे चार्ली मंगर ने भी इसी सोच को और साफ शब्दों में रखा था। मंगर ने कहा था कि अगर इससे आपकी उम्र या दोस्ती के दायरे में थोड़ी नाराजगी भी पैदा होती है, तो उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए।
दूसरे दिग्गजों की भी मिलती-जुलती राय
बफेट की यह सोच सिर्फ उन्हीं तक सीमित नहीं है। वर्जिन अटलांटिक के सह-संस्थापक रिचर्ड ब्रैनसन ने 2023 में लिंक्डइन पर लिखा था कि लोगों को अपने आसपास ऐसे लोगों को रखना चाहिए, जो उनसे ज्यादा स्मार्ट हों। उनका कहना था कि अगर ऐसे लोगों को आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया जाए, तो पूरा संगठन मजबूत होता है।
एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स भी इसी तरह की बात कह चुके हैं। 1992 के एक लेक्चर में उन्होंने कहा था कि स्मार्ट लोगों को नौकरी पर रखने का मकसद उन्हें आदेश देना नहीं, बल्कि उनसे सीखना होना चाहिए।
रिसर्च भी करती है पुष्टि
शैक्षणिक शोध भी इस सोच का समर्थन करता है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की 2017 की एक स्टडी में पाया गया कि अगर कोई कर्मचारी किसी हाई-परफॉर्मर के पास बैठता है, तो उसके काम की रफ्तार या गुणवत्ता में 15% तक सुधार हो सकता है। इस स्टडी में 2,000 से ज्यादा टेक वर्कर्स को शामिल किया गया था।
हालांकि शोधकर्ताओं ने यह चेतावनी भी दी कि इसका उल्टा असर भी हो सकता है। अगर कोई कर्मचारी लगातार नकारात्मक या ‘टॉक्सिक’ लोगों के संपर्क में रहता है, तो उसका असर पूरे माहौल पर पड़ सकता है।
रिटायरमेंट के बाद भी जिंदा रहेंगी बातें
बफेट ने अपने आखिरी शेयरहोल्डर लेटर में कहा है कि रिटायरमेंट के बाद वे सार्वजनिक रूप से कम बोलेंगे। लेकिन उनके दशकों के अनुभव से निकली ऐसी सलाहें आने वाले समय में भी युवाओं और प्रोफेशनल्स को दिशा देती रहेंगी।


