वेनेजुएला में बदले हालात से भारत को अरबों डॉलर का फायदा संभव, रूस पर भी पड़ सकता है असर

अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में बड़ा राजनीतिक बदलाव आया है। भारत ने हालात पर चिंता जताई है, लेकिन ऊर्जा और निवेश के लिहाज से यह बदलाव भारत के लिए फायदे का सौदा बन सकता है।

Virat
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Venezuela राष्ट्रपति निकोलस मादुरो

वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी हिला दिया है। भारत सरकार ने इस घटनाक्रम पर औपचारिक रूप से चिंता जताई है, लेकिन जमीनी स्तर पर देखें तो बदले हालात भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक अवसर भी खोल सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संकेतों के मुताबिक, भारत का वेनेजुएला में लंबे समय से अटका करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर का बकाया अब वापस मिलने की संभावना बन सकती है। इसके अलावा, भारतीय कंपनियों के लिए वहां फिर से तेल उत्पादन शुरू करने का रास्ता भी खुल सकता है।

ओएनजीसी को फिर मिल सकता है वेनेजुएला में रफ्तार

एक समय था जब भारत वेनेजुएला से रोजाना चार लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता था। लेकिन अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के चलते 2022 में भारत ने वहां से तेल खरीद पूरी तरह बंद कर दी थी।

भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में संयुक्त रूप से संचालन करती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण जरूरी टेक्नोलॉजी, उपकरण और सेवाएं वहां नहीं पहुंच पाईं, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा।
नतीजतन, जहां पहले उत्पादन कहीं ज्यादा था, वह घटकर करीब 5,000 से 10,000 बैरल प्रतिदिन तक सिमट गया।

अब माना जा रहा है कि अगर प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो ओएनजीसी वहां दोबारा उपकरण और तकनीक ले जाकर उत्पादन बढ़ा सकती है।

अटका हुआ बकाया भी मिल सकता है वापस

वेनेजुएला सरकार 2014 तक अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले ओएनजीसी को मिलने वाले 53 करोड़ डॉलर के लाभांश का भुगतान नहीं कर पाई थी। इसके बाद भी लगभग इतनी ही रकम का भुगतान अटका रहा।
काराकास ने ऑडिट की अनुमति नहीं दी, जिससे बकाया का निपटारा आगे नहीं बढ़ सका।

अब ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि अमेरिका के नियंत्रण में हालात बदलने के बाद प्रतिबंधों में नरमी आ सकती है। ऐसा हुआ तो ओएनजीसी न सिर्फ उत्पादन बढ़ा सकेगी, बल्कि सैन क्रिस्टोबल से मिलने वाले राजस्व के जरिए करीब एक अरब डॉलर के पुराने बकाए की वसूली भी कर सकती है।

रूस के लिए क्यों बढ़ सकती हैं मुश्किलें

वेनेजुएला के घटनाक्रम का असर रूस पर भी पड़ सकता है। हाल के वर्षों में भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ाई थी, लेकिन अब भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अगर वेनेजुएला से तेल आपूर्ति दोबारा शुरू होती है, तो भारत की रूस पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।
ओएनजीसी और अन्य भारतीय कंपनियां वेनेजुएला के नए तेल क्षेत्रों में भी दिलचस्पी दिखा सकती हैं। इनमें कैराबोबो-1 जैसे भारी तेल क्षेत्र शामिल हैं, जिसे वेनेजुएला के अहम भंडारों में गिना जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी PdVSA के पुनर्गठन में अमेरिका की भूमिका बढ़ सकती है। ऐसे में भारत को वहां निवेश और उत्पादन के नए मौके मिल सकते हैं।

 

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