अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने यह बात दोहराते हुए संकेत दिया कि उनकी सरकार वेनेजुएला के जर्जर हो चुके ऊर्जा ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए अमेरिकी तेल कंपनियों को सब्सिडी दे सकती है।
ट्रंप के मुताबिक, अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो ऊर्जा ढांचे की मरम्मत और बहाली का काम 18 महीने से भी कम समय में पूरा किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला में अगले 30 दिनों के भीतर नए चुनाव नहीं होंगे।
ऊर्जा ढांचा और तेल कंपनियों की भूमिका
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब वेनेजुएला की तेल उत्पादन क्षमता लगातार गिरती गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका की तेल कंपनियां वहां जाकर तेल से जुड़े ढांचे की मरम्मत कर सकती हैं। उनका इशारा साफ था कि इस पूरी कवायद के केंद्र में तेल और ऊर्जा से जुड़े हित हैं।
अमेरिका आज दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन उसके कई पुराने रिफाइनरी प्लांट भारी (हेवी) क्रूड पर निर्भर हैं। वेनेजुएला के पास भारी तेल का बड़ा भंडार है, भले ही मौजूदा समय में उसका उत्पादन काफी घट चुका हो।
‘कांग्रेस की मंजूरी जरूरी नहीं’
इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर वे चाहें तो वेनेजुएला में अमेरिकी सैनिक भेजने के लिए उन्हें कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। यह बयान अमेरिका के भीतर भी सवाल खड़े करता है, क्योंकि इससे पहले ऐसी कार्रवाइयों में संसद की भूमिका पर बहस होती रही है।
हालांकि, ट्रंप ने बार-बार यही दोहराया कि अमेरिका वेनेजुएला से युद्ध नहीं कर रहा है। उनका कहना था, “हम वेनेजुएला से युद्ध में नहीं हैं।”
चुनाव, नेतृत्व और सत्ता पर संकेत
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर भी ट्रंप ने कड़े बयान दिए। उन्होंने मादुरो पर नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े होने का जिक्र किया, हालांकि यह भी कहा कि वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाल करने के तर्क से मौजूदा हालात को पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वेनेजुएला के विपक्षी नेता को देश में पर्याप्त समर्थन नहीं है और अमेरिका वहां की सत्ता व्यवस्था को लेकर अलग तरह की योजना पर काम कर सकता है।
क्यों अहम है यह बयान
ट्रंप के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। एक तरफ “युद्ध नहीं” का दावा, दूसरी तरफ सैनिक भेजने और ऊर्जा ढांचे पर सीधा दखल— यही विरोधाभास इस पूरे मुद्दे को जटिल बनाता है।
तेल, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति— तीनों ही इस बयान के केंद्र में हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह सिर्फ बयानबाजी है या वाकई अमेरिका वेनेजुएला में तेल कंपनियों के जरिए नई रणनीति अपनाने जा रहा है।


