अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर नाराज़गी जाहिर की है और संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन नई दिल्ली पर टैरिफ तेजी से बढ़ा सकता है। ट्रंप ने यह बयान रविवार को फ्लोरिडा से वॉशिंगटन डीसी लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह भारत की रूसी तेल खरीद से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, “वे (भारत) मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं, वह अच्छे आदमी हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं और मेरे लिए खुश होना अहम था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।”
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उनके साथ मौजूद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि भारत पर लगाए गए टैरिफ ही मुख्य वजह हैं, जिनके चलते भारत अब रूस से कम तेल खरीद रहा है। ग्राहम ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ग्राहकों पर दबाव डालना जरूरी है।
सीनेटर ग्राहम ने अपने उस विधेयक का भी जिक्र किया, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों के आयात पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। उनका कहना था कि इसी तरह के आर्थिक दबाव से रूस को झुकाया जा सकता है।
इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि प्रतिबंधों से रूस को काफी नुकसान हो रहा है और इसी संदर्भ में उन्होंने भारत का नाम लिया। ग्राहम ने आगे कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था।
ग्राहम ने एक निजी बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले वह भारतीय राजदूत के घर गए थे, जहां बातचीत का मुख्य विषय यही था कि भारत रूस से तेल की खरीद कम कर रहा है। ग्राहम के मुताबिक, भारतीय राजदूत चाहते थे कि ट्रंप से कहकर यह टैरिफ हटवाया जाए।
कुल मिलाकर, ट्रंप के इस बयान से साफ है कि रूस से तेल खरीद का मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक संवेदनशील बिंदु बना हुआ है और टैरिफ को दबाव के औज़ार के तौर पर इस्तेमाल करने का संकेत खुलकर दिया गया है।


