उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े नए आरोपों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। देहरादून में मीडिया से बात करते हुए सीएम धामी ने संकेत दिया कि मौजूदा हालात को जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और यह उनके काम को बाधित करने की साजिश भी हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जब पेपर लीक के विरोध शुरू हुए थे, तब भी एक ऑडियो के आधार पर माहौल बना था। इस बार भी एक ऑडियो सामने आया है। क्या आपको यह साजिश जैसा नहीं लगता?” उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार एक पैटर्न के तहत मुद्दों का राजनीतिकरण किया जा रहा है।
‘न पहले किसी को बचाया गया, न आगे बचाया जाएगा’
सीएम धामी ने साफ कहा कि सरकार ने इस मामले में न पहले किसी को बचाया है और न ही भविष्य में किसी को बख्शा जाएगा। “अगर किसी के खिलाफ सबूत मिलता है, तो उस पर कार्रवाई होगी,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह खुद अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात करेंगे। “मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलूंगा और जो भी जरूरी होगा, उनकी मांगों के साथ आगे बढ़ूंगा, ताकि उन्हें अपनी बेटी के लिए न्याय मिल सके,” धामी ने कहा।
मामला क्या है
अंकिता भंडारी 19 साल की थीं और ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं। उनकी हत्या रिजॉर्ट के मैनेजर पुलकित आर्य ने की थी, जो पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। अंकिता की गुमशुदगी के छह दिन बाद उनका शव बरामद हुआ था, और वह रिजॉर्ट में काम शुरू करने के एक महीने से भी कम समय बाद मारी गई थीं।
SIT की जांच और सजा
एसआईटी जांच में सामने आया था कि अंकिता पर यौन शोषण का दबाव बनाया जा रहा था। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उनकी हत्या कर दी गई। पुलकित आर्य को हत्या, यौन उत्पीड़न, सबूत मिटाने और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
घटना के बाद से ही यह दावा किया जाता रहा है कि अपराध के दिन रिजॉर्ट में कोई “वीआईपी” मौजूद था। हालांकि एसआईटी ने अपनी जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की मौजूदगी के सबूत नहीं मिलने की बात कही थी। वीआईपी एंगल की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल हुई थी, जिसे मार्च 2025 में यह कहते हुए निपटा दिया गया कि ट्रायल चल रहा है और मामले को बंद किया जाना चाहिए।
नए आरोप और ऑडियो क्लिप
दिसंबर में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर ने एक वीडियो जारी कर दावा किया था कि वीआईपी एक वरिष्ठ भाजपा नेता है। इसके बाद उन्होंने एक और वीडियो साझा किया, जिसमें एक कथित ऑडियो क्लिप थी। इस ऑडियो में राठौर कथित तौर पर वीआईपी को ‘गट्टू’ नाम के नेता के रूप में पहचानते सुनाई देते हैं।
इस ऑडियो के सामने आने के बाद अटकलें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम तक जा पहुंचीं। हालांकि उन्होंने आरोपों से इनकार किया, संबंधित लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
सरकार की दलील
मुख्यमंत्री धामी ने घटनाक्रम दोहराते हुए कहा कि सरकार ने शुरू से हर जरूरी कदम उठाया। “घटना के तुरंत बाद तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई। अखबारों के जरिए लोगों से सबूत देने की अपील की गई। अंत में आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिली,” उन्होंने कहा।
नए ऑडियो पर उन्होंने कहा कि इसकी सच्चाई जांचना जरूरी है। “हमने फिर से एसआईटी बनाई है। हम किसी भी जांच से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन ऑडियो की विश्वसनीयता देखनी होगी। उसी ऑडियो में विरोधाभास भी हैं— कहीं हत्या की बात है, कहीं आत्महत्या की,” धामी ने कहा।
सनावर और राठौर की तलाश
उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ चल रही जांच पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस कर रही है और कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है। “उन्हें सामने आकर बताना होगा कि उन्होंने ये आरोप क्यों लगाए,” उन्होंने कहा।
विपक्ष पर निशाना
सीएम धामी ने कांग्रेस पर इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जनता का भरोसा खोने के कारण विपक्ष ऐसे मामलों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा, “हम न्याय चाहते हैं। अंकिता हमारी बेटी है। जो भी सच है, वह सामने आएगा।”


