मुरथल पराठों का सफर बना आख़िरी यात्रा, एनएच-44 पर हादसे में तीन दोस्तों की मौत

आईफोन खरीद की खुशी मनाने निकले 21 वर्षीय युवकों की स्कूटी ट्रक से टकराई, हेलमेट न पहनना पड़ा भारी

Priyanka
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सोनीपत के नांगल खुर्द फ्लाईओवर पर हुए हादसे में स्कूटी सवार तीन युवकों की मौत हो गई।

रोहतक से मुरथल पराठे खाने निकले तीन दोस्तों के लिए सोमवार की शाम जिंदगी की आख़िरी शाम साबित हुई। एनएच-44 पर सोनीपत के नांगल खुर्द फ्लाईओवर के पास हुए सड़क हादसे में तीनों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान दीपक, प्रतीक उर्फ तुषार और मयंक के रूप में हुई है। तीनों की उम्र 21 साल बताई गई है।

पुलिस के मुताबिक, तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर मुरथल के मशहूर ढाबों की ओर जा रहे थे। बताया गया कि हाल ही में खरीदे गए आईफोन 16 की खुशी में वे घूमने निकले थे। हादसा उस वक्त हुआ, जब दिल्ली–पानीपत कैरिजवे पर एक ट्रक ने अचानक ब्रेक लगा दिए और पीछे से आ रही स्कूटी उससे जा टकराई। टक्कर इतनी तेज़ थी कि तीनों युवक सड़क पर जा गिरे।

हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरे को गंभीर हालत में निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने भी दम तोड़ दिया। पुलिस ने बताया कि तीनों ने हेलमेट नहीं पहना था और सिर में गंभीर चोटें लगने के कारण उनकी जान चली गई।

ट्रक चालक वाहन मौके पर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि चालक की पहचान कर उसे पकड़ा जा सके।

परिजनों के मुताबिक, तीनों दोस्त सोमवार दोपहर करीब 3.30 बजे घर से निकले थे। उन्होंने कहा था कि सिर्फ 10 मिनट में लौट आएंगे। लेकिन कुछ घंटों बाद हादसे की खबर ने परिवारों को तोड़कर रख दिया।

मयंक, जो रोहिणी के कृष्णा विहार का रहने वाला था, बी.कॉम स्नातक था और नौकरी की तलाश में था। वह आगे बीएससी करने की भी योजना बना रहा था। परिवार पहले ही एक गम से गुजर रहा था—23 दिसंबर को मयंक के दादा का निधन हुआ था।

दीपक बीए फाइनल ईयर का छात्र था। उसके पिता ने बताया कि वह हल्के बुखार के बावजूद दोस्तों के साथ चला गया था। वह परिवार के सब्जी के कारोबार में मदद करता था और शादियों में पार्ट-टाइम फोटोग्राफी कर पैसे बचा रहा था।

प्रतीक उर्फ तुषार सेकंड ईयर का छात्र था। रिश्तेदारों ने बताया कि करीब दस साल पहले उसने अपने पिता को आत्महत्या में खो दिया था।

इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और हेलमेट की अहमियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक छोटी सी खुशी का जश्न तीन परिवारों के लिए कभी न भरने वाला खालीपन छोड़ गया।

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