पाक सेना प्रवक्ता का असामान्य आरोप, भारतीय पत्रकारों और सोशल मीडिया हैंडल्स को बताया “RAW एजेंट”

डीजी आईएसपीआर की ब्रीफिंग में स्क्रीनशॉट दिखाकर लगाए आरोप, लहजे और भाषा ने बढ़ाई बेचैनी

Priyanka
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प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय सोशल मीडिया और मीडिया पर आरोप लगाते पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी।

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने मंगलवार को एक असामान्य कदम उठाते हुए सार्वजनिक रूप से कई भारतीय सोशल मीडिया हैंडल्स और टीवी क्लिप्स का नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी पाकिस्तान की सैन्य स्थापना के खिलाफ “प्रचार अभियान” चला रहे हैं और इन्हें “RAW एजेंट” संचालित कर रहे हैं।

एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान डीजी आईएसपीआर ने स्क्रीन पर सोशल मीडिया पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट और भारतीय टेलीविजन कार्यक्रमों के अंश दिखाए। जिन अकाउंट्स का जिक्र किया गया, उनमें बाबा बनारस (@RealBababanaras), पत्रकार सिद्धांत सिब्बल (@sidhant) और नेटवर्क18 की न्यूज़ एडिटर शुभांगी शर्मा (@ItsShubhangi) शामिल हैं।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता का यह कदम सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में असहजता का कारण बना है। शीर्ष खुफिया सूत्रों का कहना है कि इस तरह सीधे-सीधे नाम लेकर आरोप लगाना सैन्य संचार की स्थापित परंपराओं से हटकर है और इससे पाकिस्तान सेना के भीतर गहरी बेचैनी और असुरक्षा का संकेत मिलता है।

इसी ब्रीफिंग के दौरान डीजी आईएसपीआर की भाषा और लहजा भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा, “मज़ा न कराया तो पैसे वापस,” और इसके साथ भारत और अफगानिस्तान की ओर इशारा करते हुए धमकी भरे अंदाज़ में बोले, “आ जाओ, तुम दोनों का स्वागत है।” उन्होंने यह दावा भी किया कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर पाकिस्तान पर हमला कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य प्रवक्ता की इस तरह की सार्वजनिक बयानबाज़ी, वह भी व्यंग्य और उकसावे की भाषा में, हाल के वर्षों में कम ही देखने को मिली है। आमतौर पर सैन्य ब्रीफिंग्स में संयमित और औपचारिक शब्दावली का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि संदेश संस्थागत और नियंत्रित दिखे।

इस घटनाक्रम को भारत-पाकिस्तान संबंधों में जारी तनाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि आलोचनात्मक पत्रकारिता और सोशल मीडिया टिप्पणियों को सीधे खुफिया एजेंसियों से जोड़ना न सिर्फ गंभीर आरोप है, बल्कि इससे प्रेस की स्वतंत्रता और सैन्य-सिविल संवाद को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।

फिलहाल भारत की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन पाकिस्तानी सेना के शीर्ष प्रवक्ता का यह बयान, अपने कंटेंट से ज्यादा, अपने अंदाज़ और सार्वजनिक मंच पर दिए गए आरोपों की वजह से चर्चा में बना हुआ है।

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