‘मुझे कभी नहीं लगा था कि जाति एक पिता से बेटी की जान ले लेगी’ — कर्नाटक में मान्या पाटिल की हत्या से उठे सवाल

अंतरजातीय विवाह के बाद गर्भवती युवती की हत्या का आरोप, CM सिद्धारमैया ने फास्ट-ट्रैक ट्रायल और ऑनर किलिंग कानून का भरोसा दिलाया

Virat
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कर्नाटक के धारवाड़ जिले के एक छोटे से गांव इनाम वीरापुर में हुई मान्या पाटिल की हत्या ने राज्य को झकझोर दिया है। 20 साल की मान्या, जो गर्भवती थीं, की कथित तौर पर उनके ही पिता और रिश्तेदारों ने इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उन्होंने एक दलित युवक से शादी की थी।

मान्या के पति विवेकानंद धोड्डमणि आज भी यह बात स्वीकार नहीं कर पा रहे कि जाति एक पिता को इतनी दूर तक ले जा सकती है। “मैंने सपना देखा था कि एक दिन मेरा बच्चा मान्या के पिता के साथ खेलेगा। मुझे कभी नहीं लगा था कि जाति किसी पिता से उसकी बेटी की जान ले लेगी,” विवेकानंद कहते हैं।

दोस्ती थी, शादी बर्दाश्त नहीं हुई

विवेकानंद बताते हैं कि मान्या के पिता प्रकाशगौड़ा पाटिल से उनकी पहले से पहचान थी, दोस्ती भी थी। दोनों परिवार एक ही गांव के थे। लेकिन जब यह रिश्ता शादी में बदला, तो वही दोस्ती एक ‘सीमा’ बन गई।

इनाम वीरापुर करीब सौ घरों का गांव है, जहां ज्यादातर आबादी लिंगायत समुदाय की है। विवेकानंद दलित मदिगा समुदाय से आते हैं, जिनके गांव में सिर्फ छह घर हैं। वे कहते हैं कि बचपन में उन्होंने खुला जातिगत भेदभाव नहीं देखा, इसलिए उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनका रिश्ता इस हद तक विरोध झेलेगा।

प्यार, भागकर शादी और डर

तीन साल पहले दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे रिश्ता गहराया। जब मान्या के पिता को इस बारे में पता चला, तो घर में कड़ी पाबंदियां लगा दी गईं। विवेकानंद के मुताबिक, मान्या मानसिक प्रताड़ना झेल रही थीं। आखिरकार दोनों ने मंदिर में शादी कर ली और उसे कानूनी रूप से रजिस्टर भी कराया।

पुलिस के सामने भी दोनों ने साफ कहा कि वे बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी की है। विवेकानंद कहते हैं कि उसी वक्त मान्या के पिता ने धमकी दी थी, लेकिन उन्होंने इसे गुस्से में कही बात मानकर नजरअंदाज कर दिया।

हत्या और प्रशासन की भूमिका

21 दिसंबर को मान्या की हत्या हुई। उस वक्त वह विवेकानंद के माता-पिता के घर थीं। आरोप है कि मान्या के पिता और रिश्तेदार जबरन घर में घुसे और हमला किया। विवेकानंद मौके पर नहीं थे। लौटने पर उन्होंने मान्या और अपने परिवार पर हमला होते देखा। उनके माता-पिता भी घायल हुए और अस्पताल में भर्ती रहे।

इस मामले में मान्या के पिता प्रकाशगौड़ा पाटिल और दो रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर हत्या और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज है। घटना के बाद ह्यूबली ग्रामीण थाने के दो पुलिसकर्मियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया।

सरकार का आश्वासन

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित सुनवाई और निजी अभियोजक की नियुक्ति की घोषणा की है। उन्होंने ऑनर किलिंग रोकने के लिए अलग कानून पर भी विचार का भरोसा दिया है।

धारवाड़ पुलिस ने गांव में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है। CCTV लगाए गए हैं, पीड़ित परिवार को चौबीसों घंटे सुरक्षा दी जा रही है और शांति बैठकें की गई हैं, ताकि कोई नया टकराव न हो।

समाज के लिए असहज सवाल

मान्या की हत्या ने सिर्फ एक परिवार नहीं तोड़ा, बल्कि कर्नाटक के समाज के सामने भी असहज सवाल रख दिए हैं। लिंगायत संगठनों ने भी इस घटना की निंदा करते हुए ‘पश्चाताप दिवस’ मनाया।

विवेकानंद कहते हैं कि विडंबना यह है कि वे खुद लिंगायत परंपराओं से परिचित हैं और बसवन्ना के सिद्धांतों को मानते हैं। “फिर भी मेरी पहचान सिर्फ मेरी जाति बन गई,” वे कहते हैं।

यह मामला अब अदालत में है, लेकिन मान्या की मौत ने यह साफ कर दिया है कि जाति की दीवारें आज भी कई जिंदगियों से बड़ी साबित हो रही हैं।

 

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