नौकरी के बदले जमीन मामला: लालू यादव, तेजस्वी-राबड़ी समेत 40 लोगों पर आरोप तय, चलेगा ट्रायल

राउज एवेन्यू कोर्ट का आदेश, CBI केस में 52 आरोपी बरी; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होगी सुनवाई

manshi
manshi
By
3 Min Read
नौकरी के बदले जमीन केस: लालू परिवार पर आरोप तय

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार के लिए कानूनी मोर्चे पर मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत कुल 40 लोगों पर आपराधिक आरोप तय कर दिए हैं। अब इस मामले में विधिवत ट्रायल चलेगा।

कोर्ट ने इस केस में 52 लोगों को आरोपों से बरी भी किया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला एक संगठित साजिश की ओर इशारा करता है, जिसमें सरकारी नौकरी को अचल संपत्ति हासिल करने के साधन के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

कोर्ट की टिप्पणी
आरोप तय करते हुए कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह संकेत मिलता है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर लाभ हासिल करने की योजना बनाई गई। इसी आधार पर अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 13(2) और 13(1)(d) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है।

क्या है नौकरी के बदले जमीन मामला
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई और यह संपत्तियां बाद में परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़े लोगों के नाम दर्ज कराई गईं।
CBI ने अक्टूबर 2022 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती को आरोपी बनाया गया था। शुरुआती चार्जशीट में लालू के बेटों के नाम नहीं थे, लेकिन बाद में जांच के दायरे में आने के बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया।

अब तक की कानूनी कार्रवाई
CBI ने मई 2022 में FIR दर्ज की थी। फरवरी 2023 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने यादव परिवार समेत 14 लोगों को समन जारी किया।
मार्च 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी, लेकिन जांच और पूछताछ का सिलसिला चलता रहा।

आगे की प्रक्रिया
अदालत का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है। आरोप तय होने के बाद अब गवाहों की सुनवाई और बहस के जरिए ट्रायल आगे बढ़ेगा।
आरोपियों के पास ऊपरी अदालत में इस आदेश को चुनौती देने का कानूनी विकल्प भी रहेगा। माना जा रहा है कि इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

Share This Article
Leave a Comment