फेड चेयर जेरोम पॉवेल पर आपराधिक जांच: अमेरिकी संस्थागत स्वतंत्रता के लिए क्या मायने रखता है

ब्याज दरों को लेकर ट्रंप प्रशासन और फेड के टकराव के बीच जेरोम पॉवेल के खिलाफ शुरू हुई जांच ने अमेरिका में स्वतंत्र संस्थानों की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है।

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jerome powell

अमेरिका में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के खिलाफ आपराधिक जांच की खबर ने सिर्फ वॉशिंगटन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के नीति-निर्माताओं का ध्यान खींचा है। वजह साफ है—फेड जैसी संस्था को अब तक अमेरिकी राजनीति से अलग, स्वतंत्र और पेशेवर फैसलों का प्रतीक माना जाता रहा है।

खुद जेरोम पॉवेल के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग ने फेड को समन (subpoena) भेजे हैं और सीनेट समिति के सामने दिए गए उनके बयान को लेकर आपराधिक अभियोग की चेतावनी दी गई है। मामला वॉशिंगटन डीसी में फेड मुख्यालय के भवन नवीनीकरण से जुड़ा बताया गया है। अभियोजकों ने औपचारिक तौर पर जांच की पुष्टि नहीं की है, लेकिन पॉवेल ने इसे सार्वजनिक कर दिया है।

पॉवेल का आरोप और प्रशासन से टकराव

पॉवेल का कहना है कि यह जांच दरअसल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी का नतीजा है। ट्रंप लंबे समय से फेड पर दबाव बना रहे हैं कि ब्याज दरें उनकी अपेक्षा के मुताबिक तेजी से घटाई जाएं। पॉवेल ने साफ शब्दों में कहा कि यह मुद्दा सिर्फ उनकी व्यक्तिगत स्थिति का नहीं, बल्कि इस सवाल का है कि क्या फेड आर्थिक आंकड़ों और परिस्थितियों के आधार पर फैसले ले पाएगा, या फिर राजनीतिक दबाव के तहत।

गौरतलब है कि जेरोम पॉवेल को पहली बार 2017 में खुद डोनाल्ड ट्रंप ने ही फेड चेयर के पद पर नामित किया था। बावजूद इसके, ब्याज दरों को लेकर दोनों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं।

फेड की स्वतंत्रता पर सीधा असर

अमेरिका में फेड को हमेशा से एक ऐसी संस्था माना गया है जो राष्ट्रपति और सरकार से एक “arm’s length distance” बनाकर काम करती है। लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह दूरी बार-बार सवालों के घेरे में आई है। पॉवेल के खिलाफ जांच को कई लोग इसी दबाव की कड़ी मान रहे हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस जांच की निगरानी वॉशिंगटन डीसी के यूएस अटॉर्नी ऑफिस द्वारा की जा रही है।

पॉवेल का जवाब

अपने वीडियो संदेश में पॉवेल ने कहा कि वह कानून के शासन और जवाबदेही में भरोसा रखते हैं और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस कार्रवाई को प्रशासन की ओर से लगातार मिल रहे दबाव और धमकियों के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर ने इस जांच को कानून के बजाय राजनीतिक वफादारी से प्रेरित बताया, जबकि एनपीआर के पत्रकार डेविड फोल्केनफ्लिक ने इसे फेड की स्वतंत्रता का असाधारण सार्वजनिक प्रदर्शन कहा।

पहले भी निशाने पर रहे फेड अधिकारी

यह पहला मामला नहीं है। ट्रंप प्रशासन पहले भी फेड की गवर्नर लिसा कुक को हटाने की कोशिश कर चुका है, जिसे संघीय अदालत ने रोक दिया था। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है। इससे पहले एफबीआई के पूर्व प्रमुख जेम्स कोमी के खिलाफ लाए गए आपराधिक आरोप भी अदालत में टिक नहीं पाए थे।

पिछले साल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि फेड एक विशिष्ट और अर्ध-निजी संस्था है, जिसकी ऐतिहासिक भूमिका उसे अन्य सरकारी निकायों से अलग बनाती है।

ब्याज दरें और आगे की राह

2025 की दूसरी छमाही में फेड ने तीन बार ब्याज दरें घटाई थीं, लेकिन 2026 की शुरुआत में महंगाई बढ़ने के संकेतों के बीच जनवरी में दर कटौती की संभावना कम मानी जा रही है। बाजार मार्च में कटौती की उम्मीद जरूर जता रहे हैं।

बड़ी तस्वीर

इस पूरे घटनाक्रम ने एक साफ संदेश दिया है—अमेरिका में फेड की जिस स्वतंत्रता को दशकों से स्थिर माना जाता रहा, वह अब पहले जैसी अडिग नहीं दिखती। इसका असर सिर्फ अमेरिकी मौद्रिक नीति पर नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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