ऑस्ट्रेलिया ने अपनी स्टूडेंट वीज़ा नीति में अहम बदलाव करते हुए भारत को Evidence Level 3 में डाल दिया है। यह स्तर ऑस्ट्रेलिया के Simplified Student Visa Framework (SSVF) के तहत सबसे ऊंची जोखिम श्रेणी माना जाता है। भारत के साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान को भी इसी कैटेगरी में रखा गया है।
ऑस्ट्रेलिया सरकार का कहना है कि यह कदम “उभरते हुए इंटीग्रिटी से जुड़े मुद्दों” को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, ये चारों देश मिलकर पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में दाखिला लेने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा थे। अब इन्हें Evidence Level 2 से बढ़ाकर Evidence Level 3 में शिफ्ट किया गया है।
भारतीय छात्रों के लिए इसका क्या मतलब है
फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में 1,40,871 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से 31,197 छात्रों ने साल 2025 में दाखिला लिया था। नई व्यवस्था का सीधा असर उन छात्रों पर नहीं पड़ेगा, जो पहले से ऑस्ट्रेलिया में हैं।
लेकिन हर साल जो हजारों भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए आवेदन करते हैं, उनके लिए वीज़ा प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले ज्यादा कड़ी और जांच-प्रधान हो सकती है। इसका मतलब है कि दस्तावेज़ों, फंडिंग और पढ़ाई के इरादों की गहन जांच की जाएगी।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने क्या कहा
ऑस्ट्रेलिया के होम अफेयर्स विभाग के प्रवक्ता ने इस बदलाव की पुष्टि करते हुए बताया कि 8 जनवरी 2026 से दक्षिण एशिया के कई देशों के Evidence Level में बदलाव किया गया है।
सरकार के मुताबिक, इस कदम का मकसद जोखिमों को बेहतर तरीके से मैनेज करना है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि वास्तविक और गंभीर छात्र ऑस्ट्रेलिया में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल कर सकें।
Evidence Level 3 का अर्थ क्या है
ऑस्ट्रेलिया के होम अफेयर्स विभाग के अनुसार, SSVF के तहत किसी देश का Evidence Level कई मानकों पर तय होता है, जैसे:
- वीज़ा रद्द होने के मामले
- वीज़ा आवेदन खारिज होने की संख्या
- वीज़ा अवधि खत्म होने के बाद भी रुकने के मामले
- अवैध रूप से रहने वाले गैर-नागरिक
- प्रोटेक्शन वीज़ा के लिए आवेदन
- स्टूडेंट वीज़ा और शिक्षा संस्थान के बीच संबंध
Evidence Level 3 में आने का मतलब है कि उस देश से आने वाले आवेदकों की प्रोफाइल को ज्यादा जोखिम वाला माना जाता है और उनकी जांच अधिक सख्ती से होती है।
छोटे देशों के लिए अलग प्रावधान
होम अफेयर्स विभाग के अनुसार, जिन देशों से ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 50 से कम है, उन्हें सामान्य तौर पर डिफॉल्ट रूप से Evidence Level 3 में रखा जाता है। हालांकि, अगर वे आय और अन्य तय मानकों पर खरे उतरते हैं, तो उन्हें Evidence Level 1 भी दिया जा सकता है।
कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया का यह फैसला भारतीय छात्रों के लिए एक चेतावनी की तरह है। पढ़ाई के रास्ते बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब सही दस्तावेज़, स्पष्ट उद्देश्य और मजबूत तैयारी पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।


