अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा से जुड़े अगले कदमों की निगरानी के लिए एक नया वैश्विक मंच बनाने की पहल की है। इसे ‘Board of Peace’ नाम दिया गया है। इस बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को दो विकल्प दिए गए हैं—तीन साल की अस्थायी सदस्यता या फिर 1 अरब डॉलर देकर स्थायी सदस्यता।
अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी के मुताबिक, जो इस चार्टर की जानकारी दे रहे थे, स्थायी सदस्यता के लिए लिया जाने वाला पैसा गाज़ा के पुनर्निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। यह चार्टर अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
किन देशों ने हामी भरी, कौन विचार कर रहे हैं
अब तक हंगरी और वियतनाम ने बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि की है। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान और वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख टो लैम ने निमंत्रण स्वीकार किया है।
भारत को भी न्योता मिला है, हालांकि इस पर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वह अमेरिका से बात कर प्रस्ताव की शर्तों को समझेगा।
इसके अलावा जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस और पाकिस्तान ने भी निमंत्रण मिलने की बात कही है। पहले ही कनाडा, तुर्की, मिस्र, पैराग्वे, अर्जेंटीना और अल्बानिया को बुलावा भेजे जाने की जानकारी सामने आ चुकी है। कुल कितने देशों को न्योता गया है, यह साफ नहीं है।
बोर्ड का काम और समयरेखा
यह बोर्ड गाज़ा में 10 अक्टूबर से लागू युद्धविराम के दूसरे और चुनौतीपूर्ण चरण की निगरानी करेगा। इसके तहत गाज़ा में एक नया फिलिस्तीनी प्रशासनिक तंत्र, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास का निरस्त्रीकरण और युद्ध से प्रभावित इलाकों का पुनर्निर्माण शामिल है।
अमेरिका आने वाले दिनों में सदस्यों की आधिकारिक सूची जारी कर सकता है, संभव है कि यह घोषणा दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान हो।
संयुक्त राष्ट्र से अलग रास्ता?
ट्रंप के पत्रों में कहा गया है कि यह बोर्ड वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए “एक नए और साहसिक दृष्टिकोण” के साथ काम करेगा। इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रभाव के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां गाज़ा को लेकर अमेरिकी वीटो के कारण कार्रवाई अटकी रही है।
कार्यकारी समिति और इज़राइल की आपत्ति
व्हाइट हाउस ने बोर्ड की सोच को आगे बढ़ाने के लिए एक एग्जीक्यूटिव कमेटी भी घोषित की है। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक प्रमुख अजय बंगा और अन्य नाम शामिल हैं।
हालांकि इज़राइल ने इस समिति पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह उसकी नीति के अनुरूप नहीं है और उससे समन्वय नहीं किया गया।
आगे की चुनौती
बोर्ड में कतर, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जो युद्धविराम की निगरानी में भूमिका निभा रहे हैं। तुर्की के हमास के साथ संबंध और इज़राइल के साथ तनावपूर्ण रिश्तों को देखते हुए उसकी भूमिका पर खास नजर रहेगी।


