भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को लेकर एक अहम समझौता तैयार हो गया है। इस पर मंगलवार को हस्ताक्षर होने की संभावना है, ठीक एक दिन बाद जब यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।
दोनों यूरोपीय नेता इस उच्चस्तरीय यात्रा के लिए नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्हें औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। रविवार शाम विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनसे मुलाकात की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बातचीत से भारत-EU संबंधों में “नया अध्याय” शुरू होगा।
समुद्री सुरक्षा से लेकर काउंटर-टेररिज्म तक
सूत्रों के मुताबिक, इस सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और EU की ओर से विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास हस्ताक्षर करेंगी।
इस साझेदारी के तहत दोनों पक्ष कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, हाइब्रिड खतरों से निपटना, अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, शांति अभियानों, परमाणु अप्रसार, निरस्त्रीकरण, अंतरिक्ष सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मुद्दे भी इस समझौते का हिस्सा होंगे।
समझौते का मकसद संयुक्त पहल और रक्षा सहयोग को आसान बनाना है। इसके तहत भारत के EU की कुछ रक्षा पहलों में भागीदारी की संभावना भी बनेगी।
सालाना संवाद और संस्थागत ढांचा
इस साझेदारी में नियमित रणनीतिक संवाद और अलग-अलग ऑपरेशनल मैकेनिज़्म शामिल होंगे। इन्हें दोनों पक्षों के रक्षा और गृह सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी आगे बढ़ाएंगे।
भारत एशिया का तीसरा देश होगा, जो EU के साथ इस तरह की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी करेगा। इससे पहले जापान और दक्षिण कोरिया यह समझौता कर चुके हैं। यह पहल ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा रणनीतियों में चीन को लेकर रुख में नरमी और पश्चिमी गोलार्ध पर ज्यादा फोकस की बात सामने आ रही है।
गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी बातचीत
भारत और EU एक “सिक्योरिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट” पर बातचीत शुरू करने की भी तैयारी कर रहे हैं। इससे गोपनीय सूचनाओं के व्यापक आदान-प्रदान का रास्ता खुलेगा और आपसी भरोसे का संकेत मिलेगा। यह पहल इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के साथ भारत के रिश्तों पर EU के कुछ पूर्वी और बाल्टिक देशों की अलग राय रही है। भारत पहले से फ्रांस और जर्मनी के साथ ऐसे द्विपक्षीय समझौते कर चुका है।
पहले से बढ़ता रहा है सैन्य सहयोग
भारत और EU के बीच बीते कुछ वर्षों में सैन्य और समुद्री सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों पक्षों ने जून 2025 में हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किए थे। इससे पहले अक्टूबर 2023 में गिनी की खाड़ी और जून 2021 में अदन की खाड़ी में भी ऐसे अभ्यास हो चुके हैं। सोमालिया तट के पास मानवीय सहायता अभियानों में एस्कॉर्ट ऑपरेशंस में भी दोनों ने मिलकर काम किया है।
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच मंगलवार को होने वाला इंडिया-EU समिट और प्रस्तावित सुरक्षा समझौता दोनों पक्षों के रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर एक नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।


