अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार को लेकर एक बार फिर तनाव के संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली पिछले साल घोषित ट्रेड फ्रेमवर्क को मंजूरी नहीं देती है, तो दक्षिण कोरियाई सामानों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाए जाएंगे।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऑटोमोबाइल, लकड़ी और फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा अन्य वस्तुओं पर टैरिफ की दर 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत की जाएगी। ट्रंप इससे पहले आर्थिक आपातकाल का हवाला देकर अमेरिकी कांग्रेस को बायपास करते हुए ये टैरिफ लगा चुके हैं, जबकि दक्षिण कोरिया में इस ट्रेड फ्रेमवर्क के लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। यह ढांचा जुलाई में घोषित किया गया था और अक्टूबर में ट्रंप की दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान इसकी पुष्टि की गई थी।
अपने संदेश में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ट्रेड डील के तहत तय शर्तों के अनुसार अपने टैरिफ तेजी से घटाए हैं और अब वह अपने व्यापारिक साझेदारों से भी यही उम्मीद करता है।
यह बयान इस बात की याद दिलाता है कि पिछले साल शुरू हुआ टैरिफ विवाद इस साल भी बार-बार सामने आ सकता है। ट्रंप लगातार टैरिफ का इस्तेमाल दूसरे देशों पर दबाव बनाने के एक औजार के तौर पर करते रहे हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिका के घरेलू राजनीतिक माहौल दोनों पर पड़ सकता है।
पहले भी ट्रंप दक्षिण कोरिया से अमेरिका में निवेश के बड़े वादों को टैरिफ से जोड़ते रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि सियोल ने आने वाले वर्षों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 350 अरब डॉलर निवेश का भरोसा दिया है, जिसमें अमेरिकी शिपयार्ड को फिर से मजबूत करने की योजनाएं भी शामिल हैं। हालांकि दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है। पिछले साल जॉर्जिया में एक हुंडई मैन्युफैक्चरिंग साइट पर इमिग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई के दौरान 475 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिससे संबंधों में खटास आई थी।
इस बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाने की किसी योजना की उन्हें अब तक आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। बयान में बताया गया कि दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान, जो इस समय कनाडा दौरे पर हैं, जल्द ही अमेरिका जाएंगे और वहां वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक से बातचीत करेंगे। साथ ही राष्ट्रपति कार्यालय के नीति प्रमुख किम योंग-बोम ट्रंप के बयान पर चर्चा के लिए बैठक बुलाने वाले हैं।
ट्रंप का यह कदम उस पैटर्न में फिट बैठता है, जिसमें वह लगातार टैरिफ की धमकी देकर व्यापारिक शर्तों पर दोबारा बातचीत की कोशिश करते हैं। हाल के दिनों में उन्होंने यूरोप के आठ देशों को भी चेतावनी दी थी और कनाडा पर चीन के साथ व्यापार बढ़ाने की स्थिति में 100 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात कही थी।
ट्रंप अपने ट्रेड फ्रेमवर्क को अमेरिका में निवेश बढ़ाने का जरिया बताते रहे हैं, लेकिन कई हाई-प्रोफाइल समझौते अब तक अंतिम रूप नहीं ले पाए हैं। यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित डील को भी अभी यूरोपीय संसद की मंजूरी नहीं मिली है। इसके अलावा अमेरिका इस साल कनाडा और मैक्सिको के साथ 2020 में संशोधित ट्रेड समझौते पर फिर से बातचीत की तैयारी में है।
साथ ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में यह मामला भी लंबित है कि क्या ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत टैरिफ लगाते समय अपनी अधिकार सीमा से आगे कदम बढ़ाया था।


