कोलकाता गोदाम अग्निकांड: 16 मौतें, सुरक्षा की अनदेखी ने कैसे बढ़ाई तबाही

आनंदपुर के दो गोदामों में लगी आग के बाद जांच में बिना फायर NOC, कमजोर ढांचा और सुरक्षा इंतजामों की कमी सामने आई है। एक मालिक गिरफ्तार, कई लोग अब भी लापता हैं।

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कोलकाता गोदाम अग्निकांड: 16 मौतें, सुरक्षा में चूक उजागर

कोलकाता के बाहरी इलाके आनंदपुर में 25-26 जनवरी की रात लगी भीषण आग अब सिर्फ एक हादसा नहीं रह गई है। यह घटना उन लापरवाहियों की ओर भी इशारा कर रही है, जिनकी कीमत 16 लोगों की जान के रूप में चुकानी पड़ी। पुलिस के मुताबिक, मरने वालों की संख्या 16 हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए अभियान जारी है।

यह आग नजीराबाद इलाके में रूबी क्रॉसिंग के पास स्थित दो गोदामों में लगी थी। उस वक्त गोदामों के भीतर कई मजदूर सो रहे थे, जो बाहर निकल ही नहीं पाए। अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि घटना के समय वहां कुल कितने लोग मौजूद थे।

बिना फायर NOC चल रहे थे गोदाम

जांच में सामने आया है कि जिन दो गोदामों में आग लगी, वे बिना अग्नि सुरक्षा मंजूरी यानी फायर NOC के चल रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से आग बुझाने में भारी दिक्कत आई और आग तेजी से फैलती चली गई।

इन्हीं में से एक गोदाम लोकप्रिय फूड चेन ‘वाह! मोमोज’ का था, जो करीब 12,000 वर्ग फुट में फैला हुआ था। यहां पैकेजिंग मटेरियल, पेय पदार्थ और अन्य जरूरी सामान रखा गया था। पास के दूसरे गोदाम में सजावटी सामान रखा था, जिसने आग को और भड़काने का काम किया।

कमजोर ढांचा, ढह गया गोदाम

आग लगने के बाद दोनों गोदामों का ढांचा कमजोर साबित हुआ और वे ढह गए। इससे बचाव अभियान पर सीधा असर पड़ा।
आपदा राहत दल के एक अधिकारी ने बताया कि ढांचा अस्थिर होने के कारण बचाव कर्मियों को बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ा। उनकी सुरक्षा को देखते हुए अभियान की रफ्तार भी धीमी रही।

फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों की जांच की जा रही है।

अब तक क्या कार्रवाई हुई

दमकल विभाग की शिकायत पर नरेंद्रपुर थाने में लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए भी इसी धारा में अलग मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने सजावटी सामान वाले गोदाम के मालिक गंगाधर दास को गिरफ्तार किया है। मेडिकल जांच के बाद उन्हें बारुईपुर उप-मंडलीय कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

परिजनों का इंतजार और दर्द

इस हादसे के बाद कई परिवार अनिश्चितता और सदमे में हैं। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए एक महिला ने बताया कि उनके पति ने आग लगने के दौरान सुबह करीब तीन बजे फोन कर कहा था कि वह शायद जिंदा न बचें। जब वह मौके पर पहुंचीं, तब तक आग बेकाबू हो चुकी थी और पुलिस भी अंदर नहीं जा पा रही थी।

एक पूर्व कर्मचारी ने भी दावा किया कि जब वह वहां काम करता था, तब गोदाम में कोई अग्नि सुरक्षा प्रणाली नहीं थी और फायर सेफ्टी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाती थी।

शुरुआती दावों पर भी विवाद

शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया था कि आग ‘वाह! मोमोज’ के गोदाम में लगी थी। हालांकि कंपनी ने इस दावे का खंडन किया है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

यह हादसा सिर्फ एक आग की घटना नहीं, बल्कि औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का गंभीर सवाल भी खड़ा करता है। जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके लिए यह नुकसान कभी नहीं भरेगा।

 

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