उत्तर प्रदेश में हजारों कर्मचारियों ने नहीं बताया संपत्ति का ब्यौरा, पुलिस और लेखपाल भी सूची में

योगी सरकार की सख्ती के बाद 68 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का वेतन रोका गया, स्वास्थ्य, गृह और राजस्व विभाग सबसे आगे

Virat
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों द्वारा संपत्ति का विवरण न देने का मामला बड़ा होता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चल रही कार्रवाई में अब तक 68 हजार से अधिक कर्मचारियों का वेतन रोका जा चुका है। वजह साफ है—समय पर चल-अचल संपत्ति का खुलासा नहीं करना।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी महीने का वेतन 68,236 कर्मचारियों को नहीं मिला। इनमें सबसे ज्यादा संख्या तृतीय श्रेणी, यानी क्लर्क स्तर के कर्मचारियों की है। सरकार का कहना है कि यह कदम नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, न कि किसी एक वर्ग को निशाना बनाने के लिए।

किन विभागों में सबसे ज्यादा लापरवाही

रिपोर्ट के अनुसार, तीन विभाग ऐसे हैं जहां संपत्ति का ब्यौरा न देने वालों की संख्या सबसे ज्यादा सामने आई है—स्वास्थ्य, गृह (पुलिस) और राजस्व।
इन विभागों के कुल 47,816 कर्मचारियों ने 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति की जानकारी अपलोड नहीं की।

  • स्वास्थ्य विभाग: 15,150 कर्मचारी
  • गृह विभाग (पुलिस): 6,479 कर्मचारी
  • राजस्व विभाग (तहसील): 5,682 कर्मचारी

इन तीनों विभागों में इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षा अधिकारी, पुलिसकर्मी और लेखपाल जैसे पदों पर तैनात कर्मचारी शामिल हैं। कुल मिलाकर यह संख्या 57 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है।

सिर्फ 8 विभागों ने निभाई पूरी जिम्मेदारी

प्रदेश में कुल 73 विभागों के 8,65,460 राज्यकर्मी हैं। इनमें से 65 विभाग ऐसे हैं, जहां सभी कर्मचारियों ने समय पर संपत्ति की जानकारी नहीं दी।
अब तक सिर्फ 8 विभागों के शत-प्रतिशत कर्मचारियों ने तय समय से पहले विवरण अपलोड किया है। इनमें पर्यावरण, ऊर्जा, सैनिक कल्याण, रेशम, आवास एवं नगर नियोजन, टेक्सटाइल, जिला गजेटियर और विधान परिषद सचिवालय शामिल हैं।

हर साल देना होता है संपत्ति का विवरण

सरकारी आचरण नियमावली के तहत सभी राज्य कर्मचारियों को हर साल अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा देना अनिवार्य है। इसके बावजूद इस बार बड़ी संख्या में कर्मचारी नियमों का पालन करते नहीं दिखे।

रिपोर्ट बताती है कि संपत्ति का खुलासा न करने वालों में

  • 22 हजार से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी,
  • 7 हजार से ज्यादा द्वितीय श्रेणी कर्मचारी,
  • और 2 हजार से अधिक प्रथम श्रेणी अधिकारी शामिल हैं।

वेतनमान की बात करें तो प्रथम श्रेणी अधिकारियों का वेतन 67,700 से 2,08,700 रुपये तक है, जबकि अन्य श्रेणियों के लिए यह दायरा अलग-अलग तय है।

सरकार की ओर से संकेत साफ हैं—जब तक संपत्ति का विवरण नहीं दिया जाएगा, वेतन पर रोक जैसी कार्रवाई जारी रह सकती है।

 

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