AI से नौकरियां खत्म होंगी? बैंक ऑफ अमेरिका के CEO ने 1969 का उदाहरण देकर दी अलग राय

ब्रायन मोयनिहैन बोले—तकनीक बदलाव लाती है, लेकिन रोजगार पूरी तरह खत्म नहीं करती

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AI से नौकरियां खत्म? BofA CEO की अलग राय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया भर में बहस तेज है। कुछ विशेषज्ञ इसे रोजगार के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। अमेरिका के फेडरल रिजर्व चेयर जेरोम पॉवेल इस पर नजर बनाए हुए हैं। एंथ्रॉपिक के CEO डारियो अमोदेई का अनुमान है कि एंट्री-लेवल व्हाइट कॉलर नौकरियों का करीब 50% हिस्सा खत्म हो सकता है। वहीं “गॉडफादर ऑफ AI” कहे जाने वाले जेफ्री हिंटन बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की आशंका जता चुके हैं।

प्यू रिसर्च के एक अध्ययन के मुताबिक, करीब 52% कर्मचारी AI के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, और 32% लोगों को लगता है कि लंबे समय में उनके लिए नौकरी के अवसर कम हो सकते हैं।

लेकिन बैंक ऑफ अमेरिका के CEO ब्रायन मोयनिहैन इस तस्वीर को इतना निराशाजनक नहीं मानते।

1969 की भविष्यवाणी और आज की हकीकत

‘This is Working’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान मोयनिहैन ने इतिहास का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 1969 में अमेरिका में 8 करोड़ लोग काम कर रहे थे। 2019 तक यह संख्या बढ़कर 16 करोड़ हो गई।

उनके मुताबिक, 1960 के दशक में यह लिखा जा रहा था कि कंप्यूटर आने के बाद प्रबंधन की जरूरत ही नहीं रहेगी। कहा गया था कि कंप्यूटर सूचना का आदान-प्रदान खुद कर लेंगे और मैनेजर बेकार हो जाएंगे।

लेकिन आज बैंक ऑफ अमेरिका में ही 20,000 मैनेजर काम कर रहे हैं। उस दौर में यह भी कहा गया था कि अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग खत्म हो जाएगी और कंप्यूटर सारी नौकरियां ले लेंगे। इसके बावजूद पांच दशकों में रोजगार दोगुना हुआ।

मोयनिहैन का तर्क है कि तकनीकी बदलाव हमेशा बड़ा होता है, लेकिन अर्थव्यवस्थाएं और श्रम बाजार पहले भी इससे उबरते रहे हैं।

वॉल स्ट्रीट में संतुलित नजरिया

उनकी यह सोच वॉल स्ट्रीट में असामान्य नहीं है। जेपी मॉर्गन के CEO जेमी डिमन भी AI को अवसर के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा है कि इस तकनीक की वजह से भविष्य में लोग कम मेहनत करके बेहतर जीवन जी सकते हैं।

हालांकि डिमन यह भी मानते हैं कि AI कुछ नौकरियां खत्म करेगा। उन्होंने साफ कहा था कि समाज, सरकार और कंपनियों को मिलकर यह तय करना होगा कि कर्मचारियों को कैसे दोबारा प्रशिक्षित किया जाए या उन्हें समय से पहले रिटायरमेंट जैसे विकल्प कैसे दिए जाएं।

उनका कहना है कि यदि अच्छी सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को अचानक कम आय वाली नौकरियों की ओर धकेल दिया गया, तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है।

बैंकिंग सेक्टर में AI का बढ़ता इस्तेमाल

बैंक ऑफ अमेरिका पहले से ही ऑटोमेटेड मॉडल और एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर रहा है, खासकर ट्रेडिंग समूहों में। 2025 में जारी Evident AI इंडेक्स के मुताबिक, बैंकिंग सेक्टर में AI उपयोग के मामले में जेपी मॉर्गन शीर्ष पर है, उसके बाद कैपिटल वन और रॉयल बैंक ऑफ कनाडा हैं। बैंक ऑफ अमेरिका भी शीर्ष दस में शामिल है।

मोयनिहैन का कहना है कि हाल के AI टूल इंसानी क्षमताओं को बढ़ाने वाले हैं। यह ऑडिटर्स, वकीलों, निवेश बैंकरों और जूनियर कर्मचारियों—सभी के काम को तेज और अधिक सटीक बना सकते हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि तकनीक को बिना नियंत्रण के नहीं छोड़ा जा सकता। लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह ज्ञान हासिल करने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है—और इसका असर जूनियर ही नहीं, वरिष्ठ कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।

बहस जारी है

AI रोजगार के लिए खतरा बनेगा या नई संभावनाएं खोलेगा—यह सवाल अभी खुला है। लेकिन इतना तय है कि बदलाव आ रहा है। कुछ विशेषज्ञ इसे जोखिम के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे उत्पादकता और कार्य-जीवन संतुलन के नए अवसर के तौर पर।

तकनीक का इतिहास बताता है कि हर बड़ी खोज के साथ आशंका भी आई है। अब देखना यह है कि AI का असर किस दिशा में जाता है—और समाज इसके लिए खुद को कितनी तेजी से तैयार करता है।

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