नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गूगल के सुंदर पिचाई और दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों के प्रमुख एक साथ मंच पर आए, तो तस्वीर प्रतीकात्मक थी—तकनीक को सबके लिए उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के साथ एकजुटता का संदेश।
लेकिन इसी दौरान एक छोटा-सा दृश्य चर्चा का कारण बन गया। सभी नेता एक-दूसरे का हाथ पकड़कर उसे ऊपर उठा रहे थे, मगर ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई, जो मंच पर एक-दूसरे के बगल में खड़े थे, कुछ पल असहज नजर आए। दोनों ने हाथ मिलाने के बजाय मुट्ठी उठाकर अभिवादन किया।
यह संयोग नहीं था। इसके पीछे बीते कुछ वर्षों से चली आ रही पेशेवर दूरी और दृष्टिकोण का फर्क जुड़ा है।
एक ही रास्ते से शुरू, लेकिन अलग मोड़
डारियो अमोडेई कभी ओपनएआई का अहम हिस्सा रहे। वे रिसर्च के उपाध्यक्ष थे और GPT-2 तथा GPT-3 जैसे बड़े भाषा मॉडल के विकास में भूमिका निभा चुके थे।
लेकिन 2020 में उन्होंने कंपनी छोड़ दी। वजह थी—AI विकास की दिशा और उसकी सुरक्षा को लेकर मतभेद। अमोडेई का मानना था कि इस तकनीक का विस्तार तेज़ी से हो रहा है, इसलिए सुरक्षा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
2021 में उन्होंने अपनी बहन डेनिएला और ओपनएआई के कुछ पूर्व सहयोगियों के साथ एंथ्रोपिक की स्थापना की। बाद में एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा था कि “किसी और की सोच से लगातार बहस करते रहना उत्पादक नहीं होता।”
यहीं से दोनों कंपनियों के रास्ते स्पष्ट रूप से अलग दिखने लगे।
- ओपनएआई — तेज़ विकास और व्यावसायिक विस्तार पर जोर
- एंथ्रोपिक — सुरक्षा और नियंत्रित विकास पर अधिक फोकस
विज्ञापन को लेकर खुली तकरार
इस साल की शुरुआत में यह प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आई, जब एंथ्रोपिक ने अमेरिका के सुपर बाउल के दौरान विज्ञापन चलाए। इन विज्ञापनों में AI चैटबॉट को ऐसे दिखाया गया जो सलाह देने के बीच में उत्पादों का प्रचार करने लगता है। अंत में टैगलाइन थी—“Ads are coming to AI. But not to Claude.”
यह संदेश ओपनएआई के उस कदम पर टिप्पणी माना गया, जिसमें ChatGPT में विज्ञापन लाने की चर्चा हुई थी।
सैम ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विज्ञापन मजेदार थे, लेकिन भ्रामक। उन्होंने साफ किया कि कंपनी ऐसे तरीके से विज्ञापन नहीं चलाएगी जैसा दिखाया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुफ्त पहुंच उनके लिए प्राथमिकता है।
यह बहस सिर्फ विज्ञापन की नहीं थी। यह उस मॉडल की थी जिसके तहत AI को आगे बढ़ाया जाएगा—व्यावसायिक मॉडल पहले या उपयोगकर्ता भरोसा पहले।
छोटा दायरा, गहरे रिश्ते
AI उद्योग की एक खासियत यह भी है कि इसके बड़े नाम एक ही शैक्षणिक और पेशेवर दायरे से निकले हैं।
ओपनएआई के सह-संस्थापकों में एलन मस्क (जो बाद में अलग हो गए), सैम ऑल्टमैन, इलिया सट्सकेवर जैसे नाम रहे। पीटर थील शुरुआती निवेशकों में शामिल थे।
एंथ्रोपिक की स्थापना भी ओपनएआई के पूर्व कर्मचारियों ने की।
हाल के वर्षों में ओपनएआई के भीतर भी सुरक्षा और विकास की दिशा को लेकर मतभेद सामने आए। सह-संस्थापक इलिया सट्सकेवर 2024 में कंपनी से अलग हुए। बाद में उन्होंने Safe Superintelligence की स्थापना की।
यानी यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ दो कंपनियों के बीच नहीं, बल्कि एक ही बौद्धिक परंपरा से निकले अलग-अलग दृष्टिकोणों के बीच है।
मंच पर दिखी तस्वीर का मतलब
दिल्ली के मंच पर हाथ न मिलाना शायद एक छोटा-सा क्षण था। लेकिन AI की दुनिया में यह संकेत था कि प्रतिस्पर्धा अब खुली और वैचारिक दोनों स्तरों पर मौजूद है।
तकनीक को लोकतांत्रिक बनाने की प्रतिबद्धता पर सब सहमत दिखे, लेकिन उस रास्ते को लेकर मतभेद साफ हैं।
और यही मतभेद आगे AI की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


