‘AI layoffs’ पर सैम ऑल्टमैन की खुली टिप्पणी, बोले—हर छंटनी का कारण AI नहीं

OpenAI CEO ने माना, कुछ कंपनियां AI के नाम पर उन छंटनियों को भी सही ठहराती हैं जिनका तकनीक से सीधा संबंध नहीं

Virat
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AI layoffs पर सैम ऑल्टमैन की टिप्पणी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर नौकरी बाजार पर कितना है, इस पर बहस जारी है। इसी बीच OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एक अहम बात कही है। उनका कहना है कि कुछ कंपनियां “AI वॉशिंग” कर रही हैं—यानी जिन छंटनियों की योजना पहले से थी, उन्हें भी AI के असर के तौर पर पेश किया जा रहा है।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में एक इंटरव्यू के दौरान ऑल्टमैन ने कहा कि उन्हें सही प्रतिशत तो नहीं पता, लेकिन “कुछ AI वॉशिंग” जरूर हो रही है। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कुछ नौकरियों पर AI का वास्तविक असर भी दिख रहा है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

हाल में नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च (NBER) की एक स्टडी में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के हजारों शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की गई। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत ने कहा कि 2022 के अंत में ChatGPT आने के बाद से AI का रोजगार पर कोई ठोस असर नहीं पड़ा।

येल बजट लैब की एक रिपोर्ट भी इसी दिशा में इशारा करती है। नवंबर 2025 तक के आंकड़ों में उन पेशों में बेरोजगारी की अवधि या नौकरी संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं मिला, जिन्हें AI से अधिक प्रभावित माना जाता है। लैब की कार्यकारी निदेशक मार्था गिम्बेल ने कहा कि इस समय व्यापक आर्थिक स्तर पर AI का बड़ा असर नजर नहीं आता।

लेकिन चेतावनी भी जारी

दूसरी ओर कुछ टेक लीडर्स का आकलन अलग है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने आशंका जताई है कि AI एंट्री-लेवल ऑफिस जॉब्स के बड़े हिस्से को खत्म कर सकता है। क्लारना के सीईओ सेबेस्टियन सिएमियातकोव्स्की ने संकेत दिया कि उनकी कंपनी 2030 तक 3,000 कर्मचारियों वाली वर्कफोर्स को एक-तिहाई तक घटा सकती है, जिसमें AI की भूमिका होगी।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 2025 फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 प्रतिशत नियोक्ता आने वाले वर्षों में AI के कारण स्टाफ घटाने की उम्मीद कर रहे हैं।

नया रोजगार भी बनेगा’

ऑल्टमैन ने यह साफ किया कि आने वाले वर्षों में AI से नौकरी विस्थापन बढ़ सकता है। लेकिन उनका मानना है कि हर तकनीकी क्रांति की तरह नए तरह के काम भी पैदा होंगे।

उन्होंने कहा, “हर टेक रिवॉल्यूशन के साथ नए काम सामने आते हैं। आने वाले कुछ सालों में AI का वास्तविक असर ज्यादा स्पष्ट दिखने लगेगा।”

‘AI हर जगह है, आंकड़ों में कम’

अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री टॉर्स्टन स्लोक ने इसे 1980 के दशक की आईटी क्रांति से जोड़ा। उस दौर में भी कंप्यूटर के प्रसार के बावजूद उत्पादकता में तुरंत उछाल नहीं दिखा था। स्लोक ने हाल में लिखा कि “AI हर जगह है, सिवाय व्यापक आर्थिक आंकड़ों में।”

हालांकि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री एरिक ब्रिन्योल्फसन का तर्क है कि ताजा डेटा अलग कहानी बता रहा है। हाल की रिपोर्ट में नौकरी वृद्धि घटकर 1,81,000 रह गई, जबकि चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 3.7 प्रतिशत रही। ब्रिन्योल्फसन के अनुसार यह संकेत हो सकता है कि उत्पादकता बढ़ रही है, लेकिन रोजगार उसी अनुपात में नहीं।

उनके पिछले शोध में यह भी पाया गया था कि जिन शुरुआती करियर वाली नौकरियों में AI का एक्सपोजर अधिक था, वहां रोजगार में 13 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि अनुभवी कर्मचारियों की स्थिति स्थिर रही या बेहतर हुई।

असली तस्वीर अभी बन रही है

पूरी बहस का निष्कर्ष अभी साफ नहीं है। एक तरफ कंपनियां AI निवेश को जायज ठहराने के लिए बड़े दावे कर रही हैं, तो दूसरी ओर आधिकारिक आंकड़े बड़े पैमाने पर बदलाव की पुष्टि नहीं कर रहे।

ऑल्टमैन की टिप्पणी इसी संतुलन को सामने लाती है—कुछ छंटनियां AI के कारण हैं, लेकिन हर निर्णय को तकनीक पर थोपना भी सही नहीं। आने वाले वर्षों में यह ज्यादा स्पष्ट होगा कि AI नौकरी बाजार को किस दिशा में ले जाता है।

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