अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “लिबरेशन डे” टैरिफ को निरस्त कर दिया। पहली नजर में यह फैसला व्यापार जगत के लिए राहत जैसा लग सकता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि टैरिफ नीति में अस्थिरता अभी खत्म नहीं हुई है। नियम बदल रहे हैं, कानूनी आधार बदल सकते हैं और कंपनियों के लिए यह समझना मुश्किल हो गया है कि किस उत्पाद पर कितना शुल्क लगेगा।
इसी अनिश्चित माहौल में एक AI कंपनी, Altana, खुद को समाधान के रूप में पेश कर रही है।
पूरी वैश्विक सप्लाई चेन का डिजिटल नक्शा
न्यूयॉर्क स्थित सात साल पुरानी स्टार्टअप Altana ने एक ऐसा AI-आधारित “नॉलेज ग्राफ” तैयार किया है, जिसे वह वैश्विक सप्लाई चेन का लाइव मैप कहती है।
यह प्लेटफॉर्म सार्वजनिक व्यापार डेटा—जैसे बिल ऑफ लैडिंग, शिपिंग रिकॉर्ड और कॉरपोरेट रजिस्ट्रेशन—को जोड़कर यह दिखाता है कि कौन-सी कंपनी क्या बनाती है, कहां बनाती है, किसके लिए बनाती है और किन कच्चे माल पर निर्भर है।
लेकिन असली ताकत तब आती है जब बड़ी कंपनियां और सरकारी एजेंसियां—जैसे शिपिंग कंपनी Maersk, जनरल मोटर्स या यूएस कस्टम्स—अपना डेटा भी इस सिस्टम से जोड़ती हैं। इससे प्लेटफॉर्म लगातार अपडेट होता रहता है और नेटवर्क का दायरा गहराता जाता है।
कंपनी के अनुसार, उसके सप्लाई चेन मैप का लगभग 60% डेटा सीधे ग्राहकों से आता है।
टैरिफ कैलकुलेटर की बढ़ी मांग
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Altana के टैरिफ कैलकुलेटर के उपयोग में अचानक उछाल देखा गया। कंपनी के मुताबिक, पिछले सप्ताह इसके इस्तेमाल में 213% की वृद्धि हुई।
इनमें से:
- लगभग 50% कैलकुलेशन धातु वाले उत्पादों से जुड़े थे
- 32% ऐसे उत्पादों के थे जिनका मूल देश चीन था
यह संकेत देता है कि कंपनियां तेजी से यह समझना चाहती हैं कि बदलते नियमों के बीच उनका वास्तविक टैरिफ जोखिम क्या है।
AI कैसे सुलझा रहा है जटिलता
Altana का एक प्रमुख उत्पाद AI-संचालित टैरिफ मैनेजमेंट सिस्टम है। यह दो अहम काम करता है:
- HS कोड असाइन करना – किसी भी आयातित वस्तु पर कौन-सा टैरिफ लागू होगा, यह उसके Harmonized System (HS) कोड से तय होता है। यह प्रक्रिया अक्सर जटिल और तकनीकी होती है।
- कंट्री ऑफ ओरिजिन कैलकुलेशन – आज की सप्लाई चेन में एक ही उत्पाद कई देशों के घटकों से बनता है। ऐसे में असली “मूल देश” तय करना आसान नहीं है।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म कंपनियों को यह भी सिमुलेट करने देता है कि अगर व्यापार नियम बदलते हैं या नए टैरिफ लगते हैं, तो उनके पूरे सप्लायर नेटवर्क पर उसका क्या असर पड़ेगा।
“जटिलता और बढ़ सकती है”
Altana के CEO इवान स्मिथ का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी टैरिफ पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। उनके अनुसार, प्रशासन नए कानूनी रास्ते खोज सकता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि “टैरिफ स्टैकिंग”—यानी एक ही उत्पाद पर उसके अलग-अलग घटकों के आधार पर कई शुल्क लगना—आने वाले समय में और आम हो सकता है।
ऐसी स्थिति में जोखिम सप्लाई चेन की गहराई में छिपा होता है। कई कंपनियों को अपने Tier-2 और Tier-3 सप्लायर्स तक की पूरी जानकारी नहीं होती। AI-आधारित विश्लेषण इस अंधे क्षेत्र को कम करने का दावा करता है।
डेटा शेयरिंग पर बदलती सोच
शुरुआत में कुछ कंपनियां अपने सप्लाई चेन डेटा को साझा करने से हिचकती थीं। लेकिन Altana का तर्क है कि आज प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सिर्फ सप्लायर की पहचान छिपाने से नहीं मिलती। असली फायदा लचीलापन, पूर्वानुमान और जोखिम प्रबंधन से आता है।
जब वैश्विक व्यापार नियम बार-बार बदल रहे हों, तब दृश्यता ही सुरक्षा बन जाती है।
व्यापक संदर्भ
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब AI का उपयोग केवल चैटबॉट या कंटेंट जनरेशन तक सीमित नहीं रहा। अब यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति, कस्टम्स अनुपालन और औद्योगिक योजना जैसे जटिल क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है।
टैरिफ का कानूनी ढांचा चाहे जैसा हो, कंपनियों के सामने असली चुनौती स्पष्ट है—जटिलता बढ़ रही है। और इसी जटिलता को मैप करने के लिए AI को एक औजार के रूप में देखा जा रहा है।


