2012 में जब माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज डिविजन के प्रमुख स्टीव सिनोफ्स्की ने अचानक कंपनी छोड़ दी, तो यह सिलिकॉन वैली के लिए अप्रत्याशित खबर थी। सिनोफ्स्की माइक्रोसॉफ्ट के सबसे ताकतवर अधिकारियों में गिने जाते थे और उन्हें उस समय कंपनी के भविष्य के नेतृत्व के संभावित दावेदारों में भी देखा जा रहा था।
उनके अचानक जाने के अगले ही दिन माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में करीब तीन प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई और कंपनी के बाजार मूल्य में अरबों डॉलर की कमी आ गई। बाद में जब उनके इस्तीफे से जुड़ा समझौता अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के दस्तावेजों में सामने आया, तो विश्लेषकों ने उसमें मौजूद शर्तों का बारीकी से अध्ययन किया।
एक शर्त ने खास तौर पर ध्यान खींचा—“नॉन-डिस्पैरिजमेंट” क्लॉज। कुछ विश्लेषकों ने इसे इस तरह देखा मानो सिनोफ्स्की से सार्वजनिक रूप से चुप रहने की अपेक्षा की जा रही हो।
दस्तावेजों में सामने आया एपस्टीन का नाम
हाल में जारी अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, इसी दौर में फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
6 अप्रैल 2013 को एपस्टीन ने सिनोफ्स्की को उनके ही इस्तीफा समझौते की कॉपी ईमेल की और उस पर टिप्पणियां मांगीं। ईमेल के आदान-प्रदान में एपस्टीन ने लिखा कि SEC में होने वाला खुलासा ऐसा लग सकता है जैसे कंपनी को इस बात की चिंता है कि सिनोफ्स्की क्या कह सकते हैं।
इस पर सिनोफ्स्की ने जवाब दिया—“मैं सहमत हूं। धन्यवाद।”
दस्तावेजों के मुताबिक एपस्टीन कई महीनों से सिनोफ्स्की के एग्जिट को लेकर उनसे बातचीत कर रहा था। अप्रैल 2013 में उसने इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका के लिए एक मिलियन डॉलर की फीस मांगी थी।
एक ईमेल में उसने लिखा कि वह इस मामले में किसी भी भूमिका में काम करने को तैयार है, बस “खलनायक” की भूमिका नहीं निभाना चाहता। उसने यह भी कहा कि वह पूरी प्रक्रिया संभाल सकता है ताकि सिनोफ्स्की खुद इससे दूर रह सकें।
एग्जिट पैकेज और फीस
आखिरकार सिनोफ्स्की ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ लगभग 14 मिलियन डॉलर का एग्जिट पैकेज साइन किया।
सितंबर 2013 में एक ईमेल के जरिए एपस्टीन को जानकारी दी गई कि भुगतान पूरा हो चुका है। अगले दिन उसके अकाउंटेंट ने पुष्टि की कि एक मिलियन डॉलर की रकम उसके खाते में पहुंच गई है।
सिनोफ्स्की, उनके वकील जय लेफकोविट्ज और कानूनी फर्म के वकील स्कॉट प्राइस पर किसी भी तरह के अपराध का आरोप नहीं लगाया गया है। इस विषय पर पूछे गए सवालों पर सिनोफ्स्की और माइक्रोसॉफ्ट दोनों ने टिप्पणी से इनकार किया।
गेट्स के नेटवर्क तक पहुंच
यह घटना एक बड़े पैटर्न की ओर इशारा करती है। न्याय विभाग के दस्तावेजों के अनुसार एपस्टीन ने बिल गेट्स तक पहुंच बनाने के लिए उनके आसपास मौजूद लोगों के जरिए संपर्क बनाए।
इनमें शामिल थे:
- स्टीव सिनोफ्स्की
- मेलानी वॉकर (गेट्स फाउंडेशन से जुड़ी न्यूरोसर्जन)
- बोरिस निकोलिक (गेट्स के विज्ञान सलाहकार)
- रूसी ब्रिज खिलाड़ी मीला एंटोनोवा
दस्तावेज बताते हैं कि एपस्टीन इन लोगों के जरिए गेट्स के कामकाज, उनके विचारों और उनके संपर्कों के बारे में जानकारी हासिल करता रहा।
मेलानी वॉकर की भूमिका
मेलानी वॉकर का नाम दस्तावेजों में कई बार सामने आता है। उन्होंने 1990 के दशक में एपस्टीन से मुलाकात की थी और बाद में उनके संपर्क में बनी रहीं।
वॉकर बाद में गेट्स फाउंडेशन में वरिष्ठ सलाहकार बनीं और विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा विश्व बैंक जैसे संस्थानों के साथ भी काम करती रहीं।
ईमेल और संदेशों में वह एपस्टीन से अपने काम और निजी जीवन से जुड़ी बातें साझा करती दिखती हैं। एक ईमेल में उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं का जिक्र भी किया।
वॉकर ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार किया है और उनके खिलाफ किसी अपराध का आरोप नहीं लगाया गया है।
बोरिस निकोलिक का मामला
इसी समय गेट्स के करीबी विज्ञान सलाहकार बोरिस निकोलिक भी अपने पद से अलग हुए। दस्तावेजों में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में भी एपस्टीन मध्यस्थ की भूमिका में सामने आया।
निकोलिक और गेट्स के बीच हुए समझौते में पांच मिलियन डॉलर का अग्रिम भुगतान और एक नए निवेश फंड के लिए आर्थिक समर्थन शामिल था। बाद में इसी से उनका वेंचर फंड शुरू हुआ।
निकोलिक ने बाद में कहा कि एपस्टीन एक कुशल जोड़तोड़ करने वाला व्यक्ति था और उससे जुड़ना उनकी गलती थी।
मीला एंटोनोवा का जिक्र
दस्तावेजों में रूसी ब्रिज खिलाड़ी मीला एंटोनोवा का भी उल्लेख मिलता है। बताया गया है कि उनका बिल गेट्स से परिचय 2009 के एक ब्रिज टूर्नामेंट में हुआ था और कुछ समय तक उनके बीच संबंध भी रहे।
बाद में एपस्टीन ने एंटोनोवा को आर्थिक मदद दी। इसमें उनकी पढ़ाई, रहने की व्यवस्था और अन्य खर्च शामिल थे।
कुछ ईमेल में एपस्टीन ने इन खर्चों का हवाला देते हुए गेट्स से आर्थिक मदद की बात उठाई थी। हालांकि एंटोनोवा के वकील का कहना है कि उन्हें एपस्टीन की इन कोशिशों की जानकारी नहीं थी।
डोनर-एडवाइज्ड फंड का विचार
दस्तावेजों के अनुसार एपस्टीन का एक प्रमुख उद्देश्य “डोनर-एडवाइज्ड फंड” बनाना था।
यह ऐसा फंड होता है जिसमें अरबपति दान के लिए पैसा रखते हैं और उसे निवेश के जरिए प्रबंधित किया जाता है। एपस्टीन का मानना था कि इस तरह के फंड से फीस के जरिए मुनाफा भी कमाया जा सकता है और टैक्स भी कम किया जा सकता है।
बताया गया है कि शुरुआती दौर में इस विचार पर चर्चा हुई थी और गेट्स इसे लेकर कुछ हद तक सकारात्मक भी दिखे थे। लेकिन बाद में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
रिश्ते में आई दूरी
बाद के वर्षों में गेट्स और एपस्टीन के बीच संपर्क कम हो गया। दस्तावेजों के अनुसार 2014 के बाद गेट्स ने एपस्टीन से सीधा संवाद लगभग बंद कर दिया था।
बिल गेट्स पहले भी कह चुके हैं कि एपस्टीन से मिलना उनकी गलती थी और उन्होंने बाद में उससे दूरी बना ली थी।
गेट्स के प्रवक्ता का कहना है कि गेट्स ने कभी एपस्टीन की किसी अवैध गतिविधि को न देखा और न उसमें भाग लिया।
मामला फिर चर्चा में क्यों
2019 में एपस्टीन को नाबालिगों की तस्करी और यौन शोषण से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। बाद में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई।
हालांकि उसके संपर्कों और प्रभावशाली लोगों से जुड़े रिश्तों पर सवाल लगातार उठते रहे हैं।
नए सामने आए दस्तावेजों ने यह दिखाया है कि एपस्टीन ने कई वर्षों तक प्रभावशाली नेटवर्क के भीतर अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश की और कई मामलों में खुद को सलाहकार या मध्यस्थ के रूप में पेश किया।


