DOGE का दावा कमजोर, घाटा घटाने में नाकामी

मस्क की लागत-कटौती पहल पर सवाल, खुद कर्मचारी ने स्वीकारा असर सीमित रहा

Virat
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DOGE घाटा कम नहीं कर सका, कर्मचारी का खुलासा

अमेरिका में सरकारी खर्च घटाने के उद्देश्य से बनाई गई एलन मस्क से जुड़ी पहल DOGE अब सवालों के घेरे में है। शुरुआती बड़े दावों के बावजूद, हालिया खुलासों से संकेत मिल रहे हैं कि यह कोशिश संघीय घाटा कम करने में प्रभावी नहीं रही।

क्या था दावा और क्या निकला नतीजा

शुरुआत में DOGE ने दावा किया था कि वह अमेरिकी बजट से करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक की कटौती कर सकता है। बाद में यह आंकड़ा घटकर लगभग 200 अरब डॉलर की बचत तक सीमित बताया गया, जिसे “जॉम्बी पेमेंट्स” यानी रद्द कॉन्ट्रैक्ट और फर्जी दावों से जोड़ा गया।

लेकिन हालिया आकलन बताते हैं कि इन बचतों का कुल संघीय घाटे पर कोई ठोस असर नहीं पड़ा।

कर्मचारी की स्वीकारोक्ति से बढ़ी चर्चा

जनवरी में दर्ज एक बयान का वीडियो सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया। DOGE से जुड़े कर्मचारी नेट कैवनॉ ने साफ कहा कि घाटा कम करने का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ।

जब उनसे पूछा गया कि क्या संघीय घाटा कम हुआ, तो उनका जवाब था—“नहीं, हमने ऐसा नहीं किया।”

यह बयान उस समय सामने आया जब एक मुकदमे में यह आरोप भी लगा कि DOGE ने ChatGPT की मदद से 100 मिलियन डॉलर से अधिक के विविधता और समावेशन (DEI) ग्रांट्स की पहचान कर उन्हें रद्द किया।

खर्च घटाने के बजाय बढ़ने के संकेत

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि इस अवधि में कुल सरकारी खर्च घटने के बजाय बढ़ा।

  • दिसंबर 2025 तक खर्च करीब 6% बढ़कर 7.558 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया
  • एक साल पहले यह 7.135 ट्रिलियन डॉलर था

विश्लेषण में यह भी सामने आया कि केवल कर्मचारियों की संख्या घटाने से बड़े स्तर पर बचत संभव नहीं थी, क्योंकि सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा वेतन से जुड़ा नहीं होता।

छंटनी का उल्टा असर

DOGE के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी की गई। लेकिन इसके बाद:

  • कई जगह कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ी
  • कर्मचारियों को हटाने, दोबारा रखने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में ही भारी खर्च हुआ
  • अनुमान है कि इस प्रक्रिया में लगभग 135 अरब डॉलर तक का बोझ पड़ा

कुछ मामलों में राजस्व पर भी असर दिखा। उदाहरण के तौर पर, टैक्स जांच कम होने से भविष्य में सरकारी आय घटने की आशंका जताई गई।

सुरक्षा और प्रशासनिक चिंताएं भी

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेषज्ञों ने यह भी चिंता जताई कि:

  • संवेदनशील सरकारी डेटा तक पहुंच का जोखिम बढ़ा
  • बड़े पैमाने पर छंटनी से प्रशासनिक कामकाज की गति धीमी हुई

सरकारी सेवाओं में देरी और कार्यक्षमता पर असर की भी बात सामने आई।

अब पुनर्गठन की जरूरत महसूस

हाल के संकेत बताते हैं कि सरकार अब कुछ पदों पर फिर से भर्ती की तैयारी कर रही है। अधिकारियों ने माना है कि restructuring के दौरान कुछ जरूरी कौशल भी खत्म हो गए, जिन्हें वापस लाना पड़ेगा।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि बड़े पैमाने पर खर्च कटौती की योजना केवल संख्या घटाने से सफल नहीं होती। सरकारी ढांचे की जटिलता और उसकी निर्भरता ऐसे फैसलों को ज्यादा सावधानी से लेने की मांग करती है।

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