AI एजेंट्स का विचार सुनने में आकर्षक लगता है। रात को सो जाएं और सुबह उठें तो आपके लिए फाइलें सॉर्ट हो चुकी हों, ईमेल ड्राफ्ट तैयार हों, रिसर्च पूरी हो चुकी हो। लेकिन जिन लोगों ने इन एजेंट्स को सच में इस्तेमाल किया है, उनका अनुभव थोड़ा अलग है।
मेटा की सुपरइंटेलिजेंस टीम में काम करने वाली समर यूए ने खुद बताया कि उनके बनाए ऑटोनॉमस AI एजेंट ने उनका पूरा इनबॉक्स डिलीट कर दिया। जबकि एजेंट को साफ निर्देश दिया गया था कि किसी भी बड़े कदम से पहले रुककर पुष्टि करे। टेस्ट इनबॉक्स में सब ठीक चल रहा था, लेकिन असली अकाउंट में एजेंट निर्देश ही “भूल” गया। यूए को तुरंत अपने मैक मिनी के पास भागना पड़ा।
यह अनुभव उस उत्साही तस्वीर से अलग है, जिसमें 24/7 AI एजेंट्स को लगभग जादुई सहायक की तरह पेश किया जा रहा है—जो रात भर काम कर लें और सुबह सब व्यवस्थित मिले।
तकनीक संभव है, भरोसा अभी सीमित
OpenClaw और Claude Code जैसे टूल्स ने तकनीकी रूप से लंबे समय तक चलने वाले एजेंट्स को संभव बना दिया है। लेकिन जो लोग इन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं, वे कहते हैं कि असली चुनौती ‘ऑटोनॉमी’ नहीं, बल्कि ‘नियंत्रित ऑटोनॉमी’ है।
पूर्व OpenAI इंजीनियर श्यामल अनादकट का कहना है कि अगर किसी वर्कफ़्लो में 20 चरण हैं और हर चरण 95% सही है, तो पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावना काफी बढ़ जाती है। लंबी योजना बनाना और कई दिनों तक संदर्भ संभालना आज भी एजेंट्स की कमजोरी है। मेमोरी या तो सीमित है या अस्थिर।
यानी छोटे और कम जोखिम वाले काम—जैसे लिंक्डइन संदेश स्कैन करना या रात भर वेबसाइट्स पढ़कर नोट्स बनाना—एजेंट ठीक से कर लेते हैं। लेकिन जहां गलती की कीमत भारी हो सकती है, वहां अभी इंसानी निगरानी जरूरी है।
‘मैजिक सॉल्यूशन’ नहीं
वेस्ट मोनरो के चीफ AI ऑफिसर ब्रेट ग्रीनस्टीन इसे एक दिलचस्प मोड़ मानते हैं। उनके मुताबिक, AI एजेंट्स अब आम लोगों की पहुंच में आ गए हैं, जैसा 2022 में ChatGPT के साथ हुआ था। लेकिन वे साफ कहते हैं—यह 24/7 का जादुई हल नहीं है।
उनके शब्दों में, यह “ऐसे बच्चे जैसा है जिस पर नजर रखनी पड़ती है।”
कुछ काम आप सोते समय इसे दे सकते हैं, लेकिन ग्राहक प्रतिक्रिया का जवाब देना जैसे काम अभी जोखिम भरे हो सकते हैं।
ग्रीनस्टीन ने खुद एक एजेंट से ड्राई-क्लीनिंग का काम करवाया। एजेंट ने ईमेल के जरिए क्लीनर से बात की, पिकअप टाइम तय किया, डोरबेल कैमरा मॉनिटर किया और काम पूरा होने की सूचना दी। यह दिखाता है कि एजेंट कई सिस्टम्स के बीच काम कर सकते हैं। लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि सख्त सीमाएं और निगरानी जरूरी हैं।
एंटरप्राइज में दांव बड़ा है
कॉरपोरेट माहौल में जोखिम और बढ़ जाता है। एक बड़े रिटेलर में काम कर रहे डेटा साइंटिस्ट अविनाश वूटकुरी बताते हैं कि एंटरप्राइज एजेंट्स को “बेबीसिटर” की जरूरत पड़ती है। खासकर साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्र में, जहां गलती का मतलब या तो असली ग्राहकों को ब्लॉक करना है या हमलावर को सिस्टम में घुसने देना।
ऐसे सिस्टम्स में एजेंट खुद अलर्ट की जांच करते हैं, डेटाबेस खंगालते हैं और तय करते हैं कि मामला गंभीर है या नहीं। इससे काम कम होता है, लेकिन इंसानी निगरानी पूरी तरह हटाई नहीं जा सकती।
भरोसे का दौर
AI ऑपरेशंस कंसल्टेंट ब्रीअन्ना व्हाइटहेड इसे “ट्रस्ट कैलिब्रेशन” का दौर कहती हैं। उनके मुताबिक, असली कौशल एजेंट बनाना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि कौन-सा काम पूरी तरह सौंपा जाए, किसे हल्की समीक्षा की जरूरत हो और क्या केवल इंसान के पास रहे।
आज के एजेंट मीटिंग नोट्स को एक्शन आइटम में बदलने, फॉलो-अप ईमेल ड्राफ्ट करने या रिसर्च संकलित करने में बेहतर हैं। लेकिन जहां रिश्तों की समझ, माहौल पढ़ने की क्षमता या जजमेंट कॉल की जरूरत हो, वहां वे कमजोर पड़ जाते हैं।
उत्साह फिर भी कम नहीं
इसके बावजूद मांग तेज है। OpenClaw जैसे टूल्स पर मीटअप और इंडस्ट्री इवेंट्स होने लगे हैं। Box के CEO एरन लेवी इसे भविष्य की झलक मानते हैं। कुछ चीजें समय के साथ सामान्य हो जाती हैं। जो दो साल पहले असंभव लगता था, वह अब इंजीनियरिंग टीमों में आम प्रैक्टिस बन चुका है।
लेकिन वे भी मानते हैं कि किसी नौकरी को पूरी तरह ऑटोमेट करना और कुछ टास्क्स ऑटोमेट करना—दो अलग बातें हैं। एजेंट कुछ हिस्सों को संभाल सकते हैं, पूरी भूमिका को नहीं।
फिलहाल नींद अधूरी
आज की स्थिति यह है कि एजेंट्स घंटों काम कर सकते हैं, लेकिन यूजर्स अक्सर आधी नींद में लॉग्स चेक करते हैं, आउटपुट देखते हैं और जरूरत पड़ने पर दखल देते हैं। AI जो हमें सुलाने वाला था, वही कई लोगों को जगाए रख रहा है।
AI एजेंट्स का सपना शायद सच हो। पर अभी के लिए, यह सुविधा और सतर्कता—दोनों का मेल है।


