दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां इस साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डेटा सेंटर्स पर करीब 700 अरब डॉलर खर्च करने जा रही हैं। यह रकम अपने आप में बताती है कि टेक इंडस्ट्री किस रफ्तार से AI इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रही है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह निवेश लंबे समय तक टिकेगा, या हम किसी नए टेक बबल के शिखर के करीब हैं?
Nvidia के CEO जेनसन हुआंग इस चिंता से सहमत नहीं दिखते। कंपनी की चौथी तिमाही की अर्निंग कॉल में उन्होंने साफ कहा कि AI पर हो रहा खर्च अभी अपने चरम से बहुत दूर है। उनके मुताबिक, “कंप्यूटिंग का यह नया तरीका अब वापस नहीं जाएगा। कंपनियां आगे भी क्षमता बढ़ाती रहेंगी।”
Nvidia के आंकड़े क्यों चौंकाते हैं?
2025 की आखिरी तिमाही में Nvidia की आय 73% बढ़कर 68.1 अरब डॉलर पहुंच गई। कंपनी ने संकेत दिया है कि मौजूदा तिमाही में बिक्री 200% तक बढ़ सकती है।
इसके बावजूद शेयर में मामूली बढ़त ही देखने को मिली। वजह साफ है—Nvidia की आधी से ज्यादा कमाई सिर्फ पांच बड़े “हाइपरस्केलर” ग्राहकों से आती है। इनमें Google, Amazon, Meta जैसी कंपनियां शामिल मानी जा रही हैं, जो बड़े पैमाने पर AI डेटा सेंटर्स बना रही हैं।
700 अरब डॉलर का कैपेक्स
इन बड़ी कंपनियों ने इस साल अपने पूंजीगत खर्च (capex) को लगभग दोगुना करने की योजना बनाई है।
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Meta: 2025 में 72 अरब डॉलर, इस साल 135 अरब डॉलर तक
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Google: 91 अरब डॉलर से बढ़ाकर 185 अरब डॉलर तक
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कुल मिलाकर: लगभग 700 अरब डॉलर का बजट
ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से कई कंपनियां अपने फ्री कैश फ्लो से ज्यादा खर्च कर रही हैं और कर्ज लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रही हैं।
अगर यही रफ्तार जारी रही, तो 2028 तक यह खर्च 2.8 ट्रिलियन डॉलर और 2029 तक 5.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। यहीं से निवेशकों की चिंता शुरू होती है।
हुआंग का तर्क क्या है?
जेनसन हुआंग का कहना है कि पहले दुनिया पारंपरिक कंप्यूटिंग पर हर साल 300-400 अरब डॉलर खर्च कर रही थी। अब AI आ चुका है और इसकी कंप्यूटिंग जरूरतें हजार गुना ज्यादा हैं।
उनके मुताबिक, AI मॉडल जिस “टोकन” पर काम करते हैं, उनकी मांग लगातार बढ़ेगी। अगर इन टोकन से वैल्यू बनती रहेगी, तो दुनिया निवेश करती रहेगी।
सीधे शब्दों में, हुआंग को भरोसा है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च रुकने वाला नहीं है।
आगे क्या?
हुआंग ने “एजेंटिक AI” को हाल के महीनों में एक बड़ा मोड़ बताया। इसके बाद अगला चरण “फिजिकल AI” का होगा—जहां रोबोटिक्स और मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों में AI मॉडल शामिल होंगे।
उनका संदेश स्पष्ट है:
AI आया है, और अब यह और बेहतर होता जाएगा।
असली सवाल
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क्या AI से जुड़ी एप्लिकेशन इतनी तेजी से राजस्व पैदा करेंगी कि यह भारी निवेश जायज ठहराया जा सके?
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क्या हाइपरस्केलर कंपनियां कर्ज के सहारे इतनी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर दौड़ लंबे समय तक जारी रख पाएंगी?
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Nvidia के बाकी 50% ग्राहक क्या इस मांग को संतुलित कर पाएंगे?
फिलहाल बाजार दो धड़ों में बंटा दिखता है। एक ओर वे लोग हैं जो इसे आने वाले आर्थिक विस्तार की नींव मानते हैं। दूसरी ओर वे निवेशक हैं जो इसे संभावित बुलबुले की शुरुआती चेतावनी मान रहे हैं।
लेकिन इतना तय है—AI पर हो रहा खर्च अब टेक सेक्टर की दिशा तय कर रहा है। और 2026 के बाद की तस्वीर इस बहस को साफ करेगी कि यह असाधारण विस्तार है या अति-उत्साह।


