कॉलेज से निकलने के बाद पहली नौकरी की तलाश अब पहले से ज्यादा कठिन होती दिख रही है। खासकर उन युवाओं के लिए, जो एंट्री लेवल रोल्स में करियर शुरू करना चाहते हैं। AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर टेक इंडस्ट्री के भीतर से ही ऐसी चिंता सामने आ रही है।
ServiceNow के CEO बिल मैकडरमॉट का कहना है कि अभी युवा ग्रेजुएट्स के बीच बेरोजगारी करीब 9% है, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में यह 30% के आसपास तक पहुंच सकती है। उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब कंपनियां तेजी से AI आधारित सिस्टम और “डिजिटल एजेंट्स” को अपनाने लगी हैं।
एंट्री लेवल काम पर सीधा असर
मैकडरमॉट के मुताबिक, आने वाले समय में बड़ी संख्या में ऐसे डिजिटल एजेंट्स कंपनियों में शामिल होंगे, जो वही काम कर सकेंगे जो आज एंट्री और मिड लेवल कर्मचारी करते हैं।
इसका सीधा असर उन भूमिकाओं पर पड़ रहा है जिन्हें “रूटीन” या दोहराव वाला काम माना जाता है।
उनका कहना है कि ऐसे रोल्स में अब इंसानों की जरूरत कम हो सकती है, जिससे नए उम्मीदवारों के लिए खुद को अलग साबित करना मुश्किल होगा।
आंकड़े क्या संकेत देते हैं
- अमेरिका में 22 से 27 साल के हालिया ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर 5.6% है
- यह सामान्य आबादी (4.2%) से ज्यादा है
- 2022 के बाद से जॉब पोस्टिंग में करीब 32% गिरावट दर्ज की गई
- शुरुआती करियर वाली नौकरियों के लिए आवेदन संख्या में 26% तक बढ़ोतरी हुई
यानी मौके कम हो रहे हैं और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
कंपनियों की हायरिंग भी धीमी
टेक सेक्टर, जो कभी नए ग्रेजुएट्स के लिए सबसे बड़ा विकल्प माना जाता था, वहां भी बदलाव साफ दिख रहा है।
- बड़ी टेक कंपनियों में नए ग्रेजुएट्स की भर्ती 2019 के मुकाबले आधे से भी कम रह गई
- पहले जहां ये ग्रेजुएट्स कुल हायरिंग का 15% होते थे, अब यह घटकर 7% के आसपास है
इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां एंट्री लेवल हायरिंग को लेकर ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
क्यों सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे युवा
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2024 और 2025 में पास हुए करीब 58% छात्र अब भी अपनी पहली नौकरी की तलाश में हैं। पहले यह आंकड़ा करीब 25% के आसपास रहता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती स्तर पर मिलने वाला “बुक नॉलेज” AI से आसानी से बदला जा सकता है, जबकि अनुभव आधारित काम अभी भी इंसानों के पक्ष में है। यही वजह है कि कम अनुभव वाले उम्मीदवार ज्यादा दबाव में हैं।
यह बदलाव सिर्फ टेक्नोलॉजी का नहीं, बल्कि नौकरी के ढांचे का भी है। कंपनियां अब वही भूमिकाएं बचाए रखना चाहती हैं जिनमें सीधे तौर पर मूल्य जोड़ने की जरूरत हो। ऐसे में नए ग्रेजुएट्स के लिए चुनौती यह है कि वे केवल डिग्री नहीं, बल्कि अपनी उपयोगिता भी साबित करें।


