अमेरिका के औद्योगिक इतिहास में “गिल्डेड एज” को उस दौर के रूप में याद किया जाता है जब कुछ उद्योगपतियों के हाथ में इतनी शक्ति केंद्रित हो गई थी कि वे पूरे तंत्र की दिशा तय करने लगे थे। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भी कुछ वैसा ही परिदृश्य उभरता दिख रहा है। फर्क बस इतना है कि इस बार यह बदलाव कहीं ज्यादा तेज है।
Anthropic के CEO डारियो अमोडी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में माना कि AI इंडस्ट्री में ताकत जिस रफ्तार से और जिस तरीके से केंद्रित हुई है, वह उन्हें असहज करती है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लगभग “रातोंरात” और “कुछ हद तक संयोगवश” हुई है।
“संयोग से कुछ लोग आगे निकल गए”
अमोडी के मुताबिक, तेज़ी से बढ़ती AI कंपनियों का नेतृत्व कुछ लोगों के हाथ में पहुंच जाना पूरी तरह योजनाबद्ध नहीं था। उनका कहना है कि यह एक तरह की “रैंडमनेस” है कि कुछ लोग ऐसे संगठनों के शीर्ष पर पहुंच गए, जिनका असर आने वाले समय में पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इतनी बड़ी शक्ति का सीमित हाथों में सिमटना उन्हें सहज नहीं लगता।
पहले भी जता चुके हैं चिंता
यह पहली बार नहीं है जब अमोडी ने इस विषय पर चिंता जताई हो। इसी साल जनवरी में उन्होंने एक लंबा लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर तकनीक से पैदा होने वाली संपत्ति और प्रभाव कुछ लोगों तक सीमित रह गए, तो इससे सामाजिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा था कि वे और उनके सह-संस्थापक अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान करने का संकल्प ले चुके हैं, ताकि धन के अत्यधिक केंद्रीकरण के दुष्प्रभाव कम किए जा सकें।
कुछ लैब्स का दबदबा
वर्तमान में अमेरिका और चीन की कुछ चुनिंदा AI लैब्स इस क्षेत्र में आगे हैं। उनके नए मॉडल या उत्पाद की घोषणा का असर शेयर बाजार तक में दिखाई देता है।
हाल ही में Anthropic ने उद्योगों के लिए विशेष प्लग-इन वाले नए टूल पेश किए। इसके बाद सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशकों को लगा कि पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं की जरूरत घट सकती है।
इससे यह संकेत भी मिला कि AI कंपनियों के फैसलों का असर अब सीधे बड़े आर्थिक ढांचे पर पड़ने लगा है।
निवेश और बढ़ती संपत्ति
AI क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर का निवेश हो रहा है। इससे तकनीकी क्षेत्र के अरबपतियों की संपत्ति में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसी संदर्भ में अमोडी का यह बयान और अधिक अहम हो जाता है, क्योंकि वे स्वयं ऐसे उद्योग के शीर्ष पर हैं जो इस बदलाव से लाभान्वित हो रहा है।
“चेतावनी देना हमारा व्यावसायिक हित नहीं”
दिलचस्प बात यह है कि अमोडी ने माना कि संभावित खतरों के बारे में खुलकर बात करना उनकी कंपनी के व्यावसायिक हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वे अपने ही बनाए मॉडल्स के जोखिमों पर चर्चा करते हैं, तो यह कोई मार्केटिंग रणनीति नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी की भावना से किया गया कदम है।
आगे क्या मायने?
AI का विस्तार अब सिर्फ तकनीकी प्रगति का सवाल नहीं रह गया है। यह आर्थिक संरचना, राजनीतिक प्रभाव और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ गया है। जब इस उद्योग के प्रमुख चेहरे खुद शक्ति के केंद्रीकरण पर सवाल उठा रहे हैं, तो यह संकेत है कि बहस सिर्फ तकनीक की नहीं, उसके असर की भी है।
AI की अगली लहर कितनी तेज होगी, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन यह स्पष्ट है कि शक्ति के संतुलन पर चर्चा अब इस क्षेत्र का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।


