AI के दौर में STEM की गारंटी कमजोर?

पीटर थियल का दावा—तकनीकी डिग्री से ज्यादा मांग अब कम्युनिकेशन और स्टोरीटेलिंग स्किल्स की

Virat
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Peter Thiel, cofounder of PayPal and Palantir Technologies

पिछले एक दशक में “कोडिंग सीखो” एक तरह से करियर मंत्र बन गया था। स्कूल से लेकर कॉलेज तक STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स को सुरक्षित भविष्य की चाबी माना गया। लिबरल आर्ट्स या इंग्लिश जैसे विषयों को अक्सर कमतर समझा गया।

लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते असर ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

टेक निवेशक और पालंटिर के सह-संस्थापक पीटर थियल का मानना है कि AI का असर तकनीकी भूमिकाओं पर ज्यादा पड़ सकता है, जबकि शब्दों और विचारों के साथ काम करने वाले लोग अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात “मैथ वाले लोगों” के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण दिख रहे हैं, बनिस्बत “वर्ड वाले लोगों” के।

जॉब मार्केट में बदलती प्राथमिकताएं

हाल ही में जारी LinkedIn की एक स्किल्स रिपोर्ट बताती है कि कम्युनिकेशन, लीडरशिप और क्रिएटिव थिंकिंग जैसी क्षमताओं की मांग बढ़ रही है। कंपनियां साफ और असरदार लिखने-बोलने वाले पेशेवरों को प्राथमिकता दे रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, “स्टोरीटेलिंग” अब एक अलग पहचान बन चुकी स्किल है। पिछले एक साल में ऐसे जॉब पोस्टिंग्स, जिनमें “स्टोरीटेलर” का जिक्र हो, दोगुनी हो गई हैं। कुछ बड़ी कंपनियां सीनियर कम्युनिकेशन भूमिकाओं के लिए ऊंचे पैकेज ऑफर कर रही हैं—कहीं शुरुआती वेतन 4 लाख डॉलर से ऊपर है, तो कहीं यह 10 लाख डॉलर से भी ज्यादा तक जा रहा है।

यह तस्वीर साफ संकेत देती है कि शब्दों, सोच और प्रस्तुति की ताकत को अब रणनीतिक भूमिका मिल रही है।

तकनीकी स्किल्स खत्म नहीं, लेकिन बदल रही हैं

इसका मतलब यह नहीं कि STEM अप्रासंगिक हो गया है। AI से जुड़ी कुछ तकनीकी स्किल्स—जैसे प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और डेटा एनोटेशन—तेजी से उभर रही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब फोकस AI को बनाने से ज्यादा उसे प्रशिक्षित और निर्देशित करने पर है।

कई जॉब पोस्टिंग्स में प्रोग्रामिंग भाषाओं की समझ के साथ-साथ भाषाई दक्षता और रचनात्मक सोच की भी मांग की जा रही है। यानी टेक और भाषा के बीच की रेखा पतली होती जा रही है।

Anthropic के क्लॉड कोड के निर्माता बोरिस चेर्नी ने यह भी स्वीकार किया कि वह खुद पिछले कुछ महीनों से सीधे कोड नहीं लिख रहे, बल्कि AI से लिखवाए गए कोड की समीक्षा कर रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि काम की प्रकृति बदल रही है—भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हो रही, बल्कि उसका स्वरूप बदल रहा है।

रोजगार के आंकड़े क्या कहते हैं?

हाल के वर्षों में नए ग्रेजुएट्स के लिए जॉब मार्केट आसान नहीं रहा। 2025 में कॉलेज पासआउट युवाओं में बेरोजगारी दर 5.6% तक पहुंची, जो 2022 में सभी कामगारों की दर से भी ज्यादा है।

न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ STEM विषयों में बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत ऊंची है। कंप्यूटर इंजीनियरिंग में यह 7.8% तक दर्ज की गई। हालांकि, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में यह औसत से कम, 2% के आसपास भी है।

यानी तस्वीर एक जैसी नहीं है—कुछ क्षेत्रों में दबाव ज्यादा है, कुछ में स्थिरता बनी हुई है।

एंट्री बैरियर भी बदलेंगे?

थियल ने एक और दिलचस्प बात कही। उनका मानना है कि भविष्य में मेडिकल जैसे पेशों में मैथ्स और फिजिक्स को एंट्री फिल्टर के तौर पर इस्तेमाल करना कम हो सकता है, क्योंकि AI कई जटिल गणनाएं खुद कर सकेगा। उनका तर्क है कि एक न्यूरोसर्जन के लिए ऑपरेशन के समय दिमाग में प्राइम नंबर का हिसाब करना जरूरी नहीं है।

यह बात इस बड़े सवाल की ओर इशारा करती है—अगर मशीनें गणना कर सकती हैं, तो इंसानों से क्या अपेक्षा रहेगी?

करियर की नई समझ

AI के दौर में शायद डिग्री से ज्यादा अहम यह होगा कि कोई व्यक्ति समस्या को कैसे समझता है, उसे कैसे समझाता है और टीम के साथ कैसे काम करता है। टेक्निकल समझ की जरूरत रहेगी, लेकिन उसके साथ संवाद, निर्णय क्षमता और रचनात्मक सोच की भूमिका बढ़ती दिख रही है।

करियर का संतुलन अब एक तरफा नहीं रहा। जो छात्र या पेशेवर सिर्फ “सुरक्षित” समझकर किसी दिशा में जा रहे थे, उनके लिए यह समय सोच बदलने का संकेत हो सकता है।

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