AI की तेजी ने टेक शेयरों को झकझोरा, निवेशकों को अब घटती कमाई का डर

जहां AI पर भारी निवेश को अब तक ग्रोथ का इंजन माना जा रहा था, वहीं ताजा बहस ने सॉफ्टवेयर और IT कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं

Virat
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AI के डर से टेक शेयरों में बड़ी गिरावट

पिछले कुछ महीनों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बाजार की सोच लगभग एकतरफा थी। यह माना जा रहा था कि कंपनियों का भारी-भरकम कैपेक्स—करीब 600 अरब डॉलर सालाना—टेक सेक्टर के लिए फायदेमंद रहेगा। AI मॉडल बनाने वाली कंपनियां, डेटा सेंटर खड़े करने वाले खिलाड़ी और उन्हें बिजली सप्लाई करने वाली एनर्जी कंपनियां, सभी को इसका सीधा फायदा मिलेगा।

लेकिन बीते 24 घंटों में यह कहानी अचानक पलट गई।

अब निवेशकों को यह एहसास होने लगा है कि AI सिर्फ नई कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि कई टेक कंपनियों के मौजूदा रेवेन्यू पर दबाव भी डाल सकता है। इसी चिंता ने टेक शेयरों में तेज बिकवाली को जन्म दिया और एक ही ट्रेडिंग सेशन में करीब 300 अरब डॉलर का मार्केट कैप साफ हो गया।

SaaS कंपनियां सबसे ज्यादा दबाव में

इस गिरावट का असर खास तौर पर सॉफ्टवेयर-एज़-ए-सर्विस (SaaS) कंपनियों पर दिखा।

माइक्रोसॉफ्ट का शेयर करीब 2.9% गिरा

जर्मनी में SAP में 3% से ज्यादा की कमजोरी दिखी

सेल्सफोर्स और सर्विसनाउ जैसे बड़े नामों में 6–7% तक की गिरावट दर्ज की गई

निवेशकों की चिंता की जड़ यह है कि AI अब एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर को लिखने, मैनेज करने और माइग्रेट करने जैसे काम खुद करने लगा है—वह भी बहुत कम समय में।

Palantir की दलील ने बदली सोच

Palantir के CEO Alex Karp और CTO Shyam Sankar ने हाल की अर्निंग कॉल में कहा कि उनका “AI Forward Deployed Engineer” प्रोडक्ट प्राकृतिक भाषा के जरिए सॉफ्टवेयर और कोड बेस मैनेज कर सकता है।

Sankar के मुताबिक, AI की मदद से जटिल SAP ERP माइग्रेशन, जो पहले सालों लेते थे, अब कुछ हफ्तों में पूरे हो सकते हैं। यही बात निवेशकों को चुभ गई—क्योंकि यही लंबी और महंगी सर्विसेज कई IT और सॉफ्टवेयर कंपनियों की स्थायी कमाई का आधार रही हैं।

IT कंपनियों की कमाई पर दबाव की आशंका

Jefferies के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि AI एप्लिकेशन सर्विस रेवेन्यू को कमजोर कर सकता है। खास तौर पर भारतीय IT कंपनियों के लिए यह चिंता बड़ी है, जहां कुल रेवेन्यू का 40–70% हिस्सा ऐसे ही सर्विसेज से आता है।

उनका कहना है कि माइग्रेशन टाइमलाइन के सिकुड़ने से इम्प्लीमेंटेशन और मैनेज्ड सर्विसेज की कमाई पर असर पड़ सकता है, और अगले एक-दो साल में ग्रोथ पर दबाव दिख सकता है।

वैल्यूएशन को लेकर बदली सोच

Yardeni Research के Ed Yardeni ने भी यही बात दोहराई कि नए AI टूल्स के रोलआउट के बाद निवेशकों ने सॉफ्टवेयर शेयरों के वैल्यूएशन मल्टीपल्स घटाने का फैसला किया। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि AI का असली असर कितना गहरा होगा, लेकिन बाजार ने एहतियात बरतनी शुरू कर दी है।

बाजारों का हाल

न्यूयॉर्क में ट्रेडिंग से पहले संकेत मिले-जुले रहे।

S&P 500 फ्यूचर्स लगभग स्थिर रहे

यूरोप और जापान के बाजारों में हल्की कमजोरी दिखी

एशियाई बाजारों में चीन और दक्षिण कोरिया मजबूती में रहे

बिटकॉइन 76 हजार डॉलर तक फिसल गया

फिलहाल, AI को लेकर बाजार का मूड बदल रहा है—जहां पहले सिर्फ अवसर दिख रहे थे, अब जोखिम भी साफ नजर आने लगे हैं।

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