आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ कोड लिखने में मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है, बल्कि कई मामलों में खुद पूरा काम संभाल रहा है। दुनिया की अग्रणी AI लैब्स में से एक Anthropic के टॉप इंजीनियरों के दावों ने सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है।
Anthropic में Claude Code प्रोजेक्ट के प्रमुख बोरिस चेर्नी ने कहा है कि उन्होंने पिछले दो महीने से एक लाइन भी कोड खुद नहीं लिखा। उनके मुताबिक, उनका 100% कोड अब Anthropic के ही AI मॉडल—Claude Code और Opus 4.5—लिख रहे हैं।
“मैं अब हाथ से एडिट भी नहीं करता”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में चेर्नी ने लिखा कि पिछले दो महीने से उनका पूरा काम AI द्वारा जनरेट किए गए कोड पर आधारित है। उन्होंने बताया कि वह न सिर्फ कोड लिखवाते हैं, बल्कि उसमें छोटे-मोटे बदलाव भी खुद नहीं करते।
चेर्नी के अनुसार, उन्होंने एक ही दिन में 22 पुल रिक्वेस्ट और उससे एक दिन पहले 27 पुल रिक्वेस्ट भेजीं—और ये सभी पूरी तरह AI द्वारा लिखी गई थीं।
उनका दावा है कि यह स्थिति सिर्फ उनके तक सीमित नहीं है। Anthropic के भीतर “लगभग पूरा” कोड अब AI से लिखा जा रहा है।
CEO ने भी दिए थे संकेत
चेर्नी की बात Anthropic के CEO डेरियो अमोडेई के हालिया बयान से भी मेल खाती है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अमोडेई ने कहा था कि उनकी कंपनी के कुछ इंजीनियर अब खुद कोड नहीं लिखते, बल्कि AI से कोड जनरेट कराकर उस पर निगरानी और एडिटिंग पर ध्यान देते हैं।
अमोडेई ने यह भी अनुमान जताया था कि अगले 6 से 12 महीनों में AI सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का ज्यादातर या पूरा काम खुद संभाल सकता है—शुरुआत से लेकर फाइनल डिलीवरी तक।
OpenAI से भी मिलते-जुलते दावे
Anthropic अकेली कंपनी नहीं है जहां ऐसे दावे सामने आए हैं। OpenAI से जुड़े एक रिसर्चर, जो X पर ‘Roon’ नाम से जाने जाते हैं, उन्होंने भी कहा कि वह अब खुद कोई कोड नहीं लिखते।
उनका कहना था कि प्रोग्रामिंग हमेशा एक तरह की मजबूरी रही है और AI के आने से वह दौर खत्म होता दिख रहा है।
इंडस्ट्री में बदलाव, लेकिन हर जगह नहीं
हालांकि AI लैब्स के अंदर तस्वीर काफी अलग है, लेकिन बाकी टेक इंडस्ट्री में अभी आंकड़े इतने ऊंचे नहीं हैं।
Microsoft के CEO सत्य नडेला ने अप्रैल 2025 में बताया था कि उनकी कंपनी में करीब 30% कोड AI द्वारा लिखा जा रहा है। Salesforce ने भी लगभग ऐसा ही आंकड़ा दिया है।
जर्नल Science में प्रकाशित एक हालिया स्टडी के मुताबिक, अमेरिका में GitHub पर Python से जुड़े लगभग 29% फंक्शंस AI से लिखे जा रहे हैं। दूसरे देशों में यह प्रतिशत इससे भी कम है।
Anthropic की ओर से एक प्रवक्ता ने भी स्पष्ट किया कि कंपनी स्तर पर अभी 70% से 90% तक कोड AI लिख रहा है। Claude Code प्रोडक्ट के मामले में यह आंकड़ा करीब 90% बताया गया है।
आगे और बढ़ेगा असर
चेर्नी का मानना है कि आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा और दूसरी कंपनियां भी इसी स्तर तक पहुंचेंगी। उनका यह भी कहना है कि सिर्फ कोडिंग ही नहीं, बल्कि अन्य कंप्यूटर आधारित कामों में भी AI की भूमिका तेजी से बढ़ेगी।
नौकरियों पर असर और नई हायरिंग सोच
AI से लिखे जा रहे कोड ने सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में नौकरियों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है, खासकर एंट्री-लेवल इंजीनियरिंग रोल्स को लेकर।
हालांकि कंपनियां कहती हैं कि AI कोडिंग को लोकतांत्रिक बनाएगा और गैर-तकनीकी लोग भी प्रोडक्ट बना सकेंगे, लेकिन इसी दौरान शुरुआती स्तर की सॉफ्टवेयर जॉब्स में गिरावट भी देखी जा रही है।
Anthropic में हायरिंग का तरीका भी बदल रहा है। चेर्नी के मुताबिक, उनकी टीम अब स्पेशलिस्ट्स के बजाय जनरलिस्ट्स को प्राथमिकता देती है, क्योंकि AI खुद ही तकनीकी डिटेल्स संभाल लेता है।
अभी सीमाएं भी हैं
चेर्नी ने यह भी माना कि AI अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कभी-कभी कॉन्सेप्चुअल गलतियां, जरूरत से ज्यादा जटिल कोड या बेकार कोड छोड़ देने जैसी समस्याएं आती हैं।
फिर भी, उनका भरोसा है कि AI-जनरेटेड कोड की गुणवत्ता आगे लगातार बेहतर होती जाएगी।
सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के लिए यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि संरचनात्मक भी है—और इसके लंबे असर अब धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं।


