अमेज़न की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी की तैयारी, क्या भारत के ऑफिस भी चपेट में आएंगे?

16 हजार कर्मचारियों की नई छंटनी की योजना, AWS और Prime से जुड़े भारतीय टीमों को लेकर बढ़ी चिंता

Virat
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Jeff Bezos

दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में एक, अमेज़न, एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। कंपनी इस हफ्ते करीब 16 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है। यह छंटनी उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत अमेज़न मिड-2026 तक कुल करीब 30 हजार नौकरियां खत्म करना चाहती है।

इस ताजा कदम ने खास तौर पर भारत में काम कर रहे अमेज़न कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार Amazon Web Services (AWS), Amazon Prime और People Experience & Technology जैसे HR से जुड़े यूनिट्स भी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि भारत में कितनी और किन टीमों पर सीधा असर पड़ेगा।

अमेज़न के CEO एंडी जैसी इससे पहले अक्टूबर 2025 में हुई छंटनी को लेकर कह चुके हैं कि यह फैसला न तो सिर्फ खर्च घटाने के लिए था और न ही सीधे तौर पर AI की वजह से। उनके मुताबिक, कंपनी में जरूरत से ज्यादा ब्यूरोक्रेसी बन गई थी और उसे कम करना जरूरी था। उस पहले दौर में भारतीय ऑफिस अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे थे, लेकिन अब दूसरे फेज को लेकर तस्वीर बदलती दिख रही है।

अमेज़न का कॉरपोरेट वर्कफोर्स मुख्य रूप से बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में केंद्रित है। मौजूदा योजना के तहत होने वाली यह छंटनी कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी मानी जा रही है। इससे पहले 2022 और 2023 में अमेज़न करीब 27 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर चुका है। फिलहाल कंपनी में दुनियाभर में लगभग 16 लाख लोग काम करते हैं, जिनमें से करीब 3.5 लाख कॉरपोरेट रोल्स में हैं। नई कटौती इन्हीं कॉरपोरेट पदों तक सीमित बताई जा रही है।

यह सिर्फ अमेज़न की कहानी नहीं है। टेक इंडस्ट्री में छंटनी का दौर लगातार जारी है। Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 269 टेक कंपनियों ने करीब 1.24 लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। इंटेल, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेज़न जैसी कंपनियां इस सूची में सबसे ऊपर रहीं।

इस ट्रेंड के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक बड़ा कारण AI पर बढ़ता निवेश है। कंपनियां महंगे GPU क्लस्टर्स और AI टैलेंट पर पैसा लगाने के लिए दूसरे रोल्स कम कर रही हैं। इसके अलावा, 2020 से 2022 के बीच जरूरत से ज्यादा हायरिंग करने वाली कंपनियां अब खर्च पर लगाम कस रही हैं, ताकि ऊंची ब्याज दरों और सुस्त कंज्यूमर डिमांड के बीच मुनाफा बनाए रखा जा सके।

इस माहौल में कर्मचारियों के लिए संदेश काफी साफ है। सिर्फ सामान्य स्किल्स या साधारण जॉब सर्च अब काफी नहीं है। कंपनियां ज्यादा चुनिंदा हो गई हैं और ऐसे प्रोफेशनल्स ढूंढ रही हैं, जो अपने काम, प्रोजेक्ट्स और समस्या सुलझाने की क्षमता को ठोस तरीके से दिखा सकें।

छंटनी की सुर्खियों के बीच यह भी सच है कि टेक सेक्टर में हजारों पद अब भी खाली हैं, लेकिन उनके लिए सही स्किल्स और अनुभव की मांग पहले से कहीं ज्यादा कड़ी हो चुकी है।

 

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