अमेरिका ने WHO से आधिकारिक तौर पर नाता तोड़ा, 2,380 करोड़ रुपये का बकाया भी नहीं चुकाएगा

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के बाद अमेरिकी फंडिंग बंद, कर्मचारियों की वापसी और WHO पर गहराता वित्तीय संकट

Virat
Virat
By
4 Min Read
अमेरिका ने WHO छोड़ा, 2,380 करोड़ का कर्ज भी नहीं चुकाएगा

अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक तौर पर बाहर निकलने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके साथ ही अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह WHO का बकाया करीब 2,380 करोड़ रुपये का कर्ज भी नहीं चुकाएगा।

अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) के मुताबिक, WHO को दी जाने वाली सभी तरह की फंडिंग रोक दी गई है और अमेरिकी कर्मचारियों को जिनेवा स्थित मुख्यालय समेत दुनिया भर के WHO कार्यालयों से वापस बुला लिया गया है।

यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन लिए गए उस कार्यकारी आदेश का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका को WHO से बाहर निकालने का निर्देश दिया गया था।

बकाया चुकाने से क्यों इनकार

ब्लूमबर्ग और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका पर WHO का 2,380 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान बकाया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह राशि चुकाने की कोई वैधानिक बाध्यता नहीं है।

HHS के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि WHO छोड़ने से पहले कर्ज चुकाना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका पहले ही इस संगठन को जरूरत से ज्यादा फंड दे चुका है।

WHO का सबसे बड़ा सहारा था अमेरिका

अब तक अमेरिका WHO का सबसे बड़ा दानदाता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 और 2023 के बीच अमेरिका ने करीब 1,200 करोड़ रुपये WHO को दिए थे।

WHO को दो तरह से फंड मिलता है—

  • सदस्य देशों से अनिवार्य योगदान
  • देशों और संगठनों से स्वैच्छिक दान

अनिवार्य योगदान में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत थी, जबकि 2023 में WHO को मिले स्वैच्छिक दान का लगभग 13 प्रतिशत अमेरिका से आया था।

अमेरिका ने क्यों छोड़ा WHO

जनवरी 2025 में जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप प्रशासन ने WHO पर कई आरोप लगाए थे। इनमें कहा गया था कि संगठन अमेरिका से अनुचित रूप से ज्यादा फंड की मांग करता है, जबकि अन्य देशों पर यह बोझ कम है।

इसके अलावा कोविड-19 महामारी के दौरान कमजोर प्रबंधन और जरूरी सुधारों को लागू न करने को भी वजह बताया गया। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि WHO बीमारियों की रोकथाम, प्रबंधन और जानकारी साझा करने में नाकाम रहा।

दुनिया पर क्या असर पड़ेगा

अमेरिका के इस फैसले का सीधा असर वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर पड़ रहा है। WHO कई देशों में टीकाकरण, टीबी उन्मूलन और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाएं चलाता है।

अमेरिकी फंडिंग रुकने के बाद WHO आर्थिक दबाव में है। संगठन ने अपनी प्रबंधन टीम में आधे कर्मचारियों की छंटनी कर दी है और कई कार्यक्रम बंद करने पड़े हैं। WHO का कहना है कि इस साल उसे अपने कुल कर्मचारियों में से करीब एक चौथाई की संख्या घटानी पड़ सकती है।

WHO की भूमिका क्या है

WHO संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1948 में हुई थी। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में है।
यह संस्था वैश्विक स्वास्थ्य नीति, रोग नियंत्रण और किसी भी बड़ी महामारी के समय अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया के समन्वय का काम करती है।

Share This Article
Leave a Comment