उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड सुर्खियों में है। एक वायरल ऑडियो क्लिप और नए आरोपों ने पुराने जख्मों को फिर हरा कर दिया है, जिससे न सिर्फ सियासी बयानबाज़ी तेज हुई है बल्कि केस से जुड़े कई अनसुलझे सवाल भी दोबारा उठ खड़े हुए हैं।
मुख्य तथ्य
- 2022 में अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में तीन आरोपी दोषी ठहराए जा चुके हैं
- हालिया विवाद एक कथित ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद शुरू हुआ
- BJP राष्ट्रीय महासचिव दुश्यंत गौतम पर अप्रत्यक्ष आरोप लगाए गए
- आरोप लगाने और ऑडियो साझा करने वालों पर IT एक्ट और BNS के तहत FIR दर्ज
- दुश्यंत गौतम ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है
क्या है नया विवाद?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड़ तब आया जब पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर ने दावा किया कि अंकिता से कथित रूप से यौन संबंध की मांग करने वाला “VIP” कोई बड़ा राजनीतिक नेता था। इसी दावे से जुड़ी एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आई, जिसमें “गट्टू” नाम का जिक्र किया गया।
इस क्लिप के सामने आते ही राज्य की राजनीति में हलचल मच गई। आरोप सीधे तौर पर BJP के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुश्यंत गौतम से जोड़े जाने लगे।
दुश्यंत गौतम की सफाई
आरोपों के बाद दुश्यंत गौतम ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि उनका राजनीतिक और सामाजिक जीवन 27 वर्षों का है, जिसमें महिलाओं के प्रति उनके सम्मान और आचरण पर कभी सवाल नहीं उठा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वायरल वीडियो और ऑडियो क्लिप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर लगाए गए आरोपों का कोई ठोस सबूत सामने आता है, तो वह सार्वजनिक जीवन से इस्तीफा देने को भी तैयार हैं।
गौतम ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले में गृह सचिव को पत्र लिखकर वीडियो हटाने और स्रोत की जांच की मांग की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और FIR
इस पूरे विवाद के बाद देहरादून और हरिद्वार में दो FIR दर्ज की गई हैं। इनमें IT एक्ट, BNS, आपराधिक धमकी और साजिश जैसी धाराएं शामिल हैं।
BJP के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए, जबकि पार्टी नेतृत्व ने कांग्रेस पर इस मामले को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया।
वहीं कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग दोहराई है और कहा है कि शुरुआत से ही प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई।
अंकिता भंडारी केस की पृष्ठभूमि
19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 2022 में हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि वह एक रिज़ॉर्ट में काम करती थीं और वहां दबाव व अनुचित मांगों से परेशान थीं।
मई में कोर्ट ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन अंकिता के परिवार का कहना है कि “VIP एंगल” की अब तक पूरी जांच नहीं हुई।
यह नया विवाद इसी अधूरे सवाल को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।
निष्कर्ष
अंकिता भंडारी मामला अब सिर्फ एक कानूनी केस नहीं, बल्कि नैतिकता, सत्ता और जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन चुका है।
नए आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है, लेकिन यह साफ है कि समाज और राजनीति दोनों के लिए यह मामला अब भी पूरी तरह बंद अध्याय नहीं है।
Q&A Section
Q1: क्या नए आरोपों से अंकिता भंडारी केस फिर से खुलेगा?
फिलहाल कोर्ट का फैसला आ चुका है, लेकिन नए सबूत या आरोप सामने आने पर जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।
Q2: वायरल ऑडियो क्लिप की सच्चाई कैसे तय होगी?
ऑडियो की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के बाद ही यह तय होगा कि वह असली है या डिजिटल छेड़छाड़ का मामला।


