इस हफ्ते क्रिप्टो बाजार में जो हुआ, उसने अनुभवी निवेशकों को भी चौंका दिया। बिटकॉइन एक ही दिन में लगभग 15,000 डॉलर टूट गया। ऐसा तेज झटका 2022 में सैम बैंकमैन-फ्राइड के साम्राज्य के ढहने के बाद ही देखा गया था। शुक्रवार तक कीमतें काफी हद तक संभलकर करीब 70,000 डॉलर के आसपास पहुंच गईं, लेकिन बाजार के भीतर एक ही सवाल गूंजता रहा—आखिर हुआ क्या?
कई वजहों पर चर्चा हो रही है, लेकिन एक थ्योरी सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है। इसके मुताबिक, इस गिरावट की जड़ें हांगकांग के कुछ हेज फंड्स में छिपी हो सकती हैं, जिन्होंने बिटकॉइन पर बहुत ज्यादा लीवरेज के साथ दांव लगाए थे।
हांगकांग से जुड़ता है एक बड़ा संकेत
यह थ्योरी X पर पार्कर व्हाइट ने रखी है, जो पहले इक्विटी ट्रेडर रहे हैं और अब DeFi Development Corporation नाम की क्रिप्टो फर्म में COO हैं। व्हाइट का कहना है कि ऐसे संकेत मिले हैं कि हांगकांग के कुछ हेज फंड्स अचानक फंस गए।
उनके मुताबिक, इन फंड्स ने BlackRock के IBIT में कॉल ऑप्शंस खरीदे थे। IBIT दुनिया का सबसे बड़ा बिटकॉइन ETF है। व्हाइट का दावा है कि इन फंड्स ने ये पोज़िशन जापानी येन कैरी ट्रेड के जरिए फंड की थीं, यानी सस्ते कर्ज से ज्यादा जोखिम वाले दांव लगाए गए।
यह दांव इस उम्मीद पर था कि अक्टूबर में आई बड़ी बिकवाली के बाद बिटकॉइन में जोरदार वापसी होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
एक के बाद एक झटके
व्हाइट का कहना है कि हालात तब और बिगड़े जब येन कैरी ट्रेड से जुड़ी मुश्किलें बढ़ीं, जिससे फंडिंग महंगी हो गई। इसके साथ ही, कुछ फंड्स का सिल्वर मार्केट में भी एक्सपोज़र था, जहां हाल ही में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया।
इन सबने मिलकर एक ऐसा माहौल बना दिया, जहां फंड्स की होल्डिंग्स की वैल्यू गिरती चली गई। जैसे-जैसे बिटकॉइन और फिसला, फंड्स पर लिक्विडेशन का दबाव बढ़ा। नतीजा यह हुआ कि IBIT के ETF शेयर बड़े पैमाने पर बेचे गए, और इससे बिटकॉइन की कीमत में भारी गिरावट आई।
व्हाइट ने ट्रेडर की भाषा में इसे ऐसे समझाया—उच्च लीवरेज वाले, आउट-ऑफ-द-मनी कॉल ऑप्शंस, उधार के पैसे से खरीदे गए थे। नुकसान बढ़ता गया, फंडिंग लागत भी बढ़ी, और आखिरी झटका बिटकॉइन की गिरावट ने दिया।
क्रिप्टो दुनिया से बाहर के खिलाड़ी
इस थ्योरी का एक अहम पहलू यह है कि ये हेज फंड्स सीधे क्रिप्टो इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं थे। वे सिर्फ ETF के जरिए बिटकॉइन में ट्रेड कर रहे थे। इसलिए उनकी परेशानी की चर्चा “क्रिप्टो ट्विटर” जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सामने नहीं आई, जहां आमतौर पर ऐसे संकेत पहले दिख जाते हैं।
यही वजह है कि बाजार को अचानक यह झटका लगा और किसी को पहले से अंदेशा नहीं हुआ।
सिर्फ एक वजह नहीं होती गिरावट
हालांकि, खुद व्हाइट भी मानते हैं कि यह सिर्फ एक थ्योरी है। इतिहास बताता है कि बिटकॉइन जैसी बड़ी गिरावटें आमतौर पर कई कारणों से होती हैं, न कि किसी एक घटना से।
इस हफ्ते की गिरावट ऐसे समय पर आई जब AI से जुड़े एसेट्स में भी बिकवाली का दबाव था। इसके अलावा, एक अहम ब्लॉकचेन बिल को लेकर अनिश्चितता और एपस्टीन फाइल्स में क्रिप्टो से जुड़े नामों का आना—ये सभी बातें मिलकर बाजार की धारणा को कमजोर कर सकती थीं।
फिर भी, कई जानकारों को हांगकांग हेज फंड वाली थ्योरी भरोसेमंद लग रही है। वेंचर कैपिटलिस्ट हसीब कुरैशी ने इसे संभव बताया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसकी पुष्टि में महीनों लग सकते हैं, क्योंकि कई बार कोई बड़ा खिलाड़ी चुपचाप डूब जाता है और उसकी पहचान सामने नहीं आती।
फिलहाल, इस गिरावट का असली कारण पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि बिटकॉइन की यह उथल-पुथल सिर्फ एक तकनीकी मूव नहीं, बल्कि ग्लोबल फाइनेंस के कई धागों से जुड़ी कहानी हो सकती है।


