Latest कविता News
हम सब इस जीवन के पथिक हैं, थोड़ी देर ठहरने वाले मुसाफ़िर, आख़िरकार लौटने वाले अपने ही घर की ओर।…
भय अब मुझसे कोसों दूर जा चुका है,तुम्हारे झूठ और छल से उपजा डरअपनी अंतिम साँस ले चुका है।मैं स्मृतियों…

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