देश में साइबर ठगी और धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। 2025 में ही महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना—इन पांच राज्यों में लोगों को 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगा है। यह खुलासा गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के ताजा आंकड़ों से हुआ है।
I4C के अनुसार, पिछले छह साल में देशभर में अलग-अलग तरह की ठगी और धोखाधड़ी में कुल 52,976 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इसमें निवेश के नाम पर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, बैंकिंग फ्रॉड, ऑनलाइन स्कैम और साइबर फिशिंग जैसे मामले शामिल हैं।
2025 में सबसे ज्यादा नुकसान
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में ही 19,812.96 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई और 21.7 लाख से ज्यादा शिकायतें सामने आईं। इसके मुकाबले 2024 में 22,849 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 7,463 करोड़ रुपये रहा।
अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों की संख्या और ठगी के तरीकों—दोनों में लगातार इजाफा हो रहा है।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा ठगी
2025 के आंकड़ों में महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहा। यहां 3,203 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। इसके बाद कर्नाटक में 2,413 करोड़ रुपये, तमिलनाडु में 1,897 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश में 1,443 करोड़ रुपये और तेलंगाना में 1,372 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई।
इन पांच राज्यों में हुआ नुकसान देशभर के कुल नुकसान का आधे से ज्यादा है। अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादा शहरीकरण और डिजिटल लेनदेन इन राज्यों को ठगों के लिए आसान निशाना बनाता है।
निवेश के नाम पर सबसे बड़ा खेल
आंकड़ों से पता चलता है कि कुल ठगी का 77 फीसदी हिस्सा फर्जी निवेश योजनाओं से जुड़ा है। इसके अलावा 8 फीसदी डिजिटल अरेस्ट, 7 फीसदी क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, 4 फीसदी सेक्सटॉर्शन, 3 फीसदी ई-कॉमर्स फ्रॉड और 1 फीसदी ऐप या मालवेयर आधारित ठगी से जुड़ा है।
विदेशों से ऑपरेट हो रहे स्कैम
सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम के मुताबिक, 2025 में करीब 21 करोड़ साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से लगभग 45 फीसदी शिकायतों का संबंध दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों—कंबोडिया, म्यांमार और लाओस—से जुड़े स्कैम नेटवर्क से बताया गया है।
क्यों बढ़ रही है साइबर ठगी
जांच एजेंसियों का कहना है कि तेजी से डिजिटल हो रही अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन लेनदेन में बढ़ोतरी और ठग गिरोहों की बढ़ती तकनीकी समझ इसके बड़े कारण हैं। पहले जहां बड़े शहर निशाने पर रहते थे, अब छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी फर्जी लोन ऐप और ज्यादा रिटर्न का लालच देकर लोगों को ठगा जा रहा है।
साफ है कि साइबर ठगी अब सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं रही, बल्कि आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खतरा बनती जा रही है।


