‘कंपनी खून चूस रही है’: दिल्ली में आज डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल, जानिए क्या हैं उनकी मांगें

पेमेंट की पारदर्शिता, आईडी ब्लॉक होने और 10 मिनट डिलीवरी मॉडल के खिलाफ Swiggy-Zomato सहित कई प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी वर्कर्स का प्रदर्शन

Virat
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दिल्ली में गिग वर्कर्स की हड़ताल, 10 मिनट डिलीवरी पर सवाल

नए साल की पूर्व संध्या पर दिल्ली और आसपास के इलाकों में फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। Swiggy, Zomato, Blinkit और अन्य प्लेटफॉर्म्स से जुड़े गिग वर्कर्स यूनियनों ने आज हड़ताल का ऐलान किया है। उनकी मांगें साफ हैं—कमाई का साफ़ हिसाब, बिना वजह वर्कर आईडी ब्लॉक न होना और 10 मिनट डिलीवरी मॉडल पर रोक।

यह हड़ताल 25 दिसंबर को हुई आंशिक हड़ताल के बाद बुलाई गई है। उस दिन भागीदारी सीमित रही थी, लेकिन गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद में दोपहर और शाम के समय डिलीवरी पर असर दिखा था।

कौन-कौन सी यूनियन कर रही हैं समर्थन

इस हड़ताल का आह्वान तेलंगाना स्थित Telangana Gig and Platform Workers Union (TGPWU) और कर्नाटक की Indian Federation of App-based Transport Workers (IFAT) ने किया है। दिल्ली की Gig Workers Association (GiGWA) ने भी समर्थन दिया है।

TGPWU के अध्यक्ष शेख सल्लाउद्दीन के मुताबिक, क्रिसमस के दिन करीब 50 हजार वर्कर्स शामिल हुए थे, जबकि आज यह संख्या डेढ़ लाख तक पहुंचने की उम्मीद है।

10 मिनट डिलीवरी से जुड़ा जोखिम

डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि 10 मिनट डिलीवरी का दबाव सीधे उनकी सुरक्षा से जुड़ा है।
दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश में एक Blinkit वेयरहाउस पर तैनात डिलीवरी पार्टनर ने बताया, “एक सेकंड भी देर हुई तो पूरे दिन का इंसेंटिव कट जाता है। रेड लाइट जंप करनी पड़ती है, कम विज़िबिलिटी में भी बाइक चलानी होती है।”

गुरुग्राम सेक्टर-52 में Swiggy का ऑर्डर देकर लौट रहे एक डिलीवरी पार्टनर ने नाराज़गी में कहा, “अब तो कंपनी खून चूस रही है।”

काम के घंटे बढ़े, कमाई अनिश्चित

वर्कर्स का कहना है कि बीते महीनों में न्यूनतम काम के घंटे 10 से बढ़ाकर 13 कर दिए गए हैं।
डिलीवरी पार्टनर आकाश के मुताबिक, “अगर 13 घंटे पूरे न हों या रात 11:30 से पहले काम बंद कर दें, तो डेली इंसेंटिव कट जाता है।”

GiGWA के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी नितेश कुमार दास का कहना है कि भुगतान का मौजूदा सिस्टम केवल पूरे किए गए ऑर्डर पर आधारित है, न कि काम के कुल समय पर। “वेटिंग टाइम, खराब मौसम, ट्रैफिक—इन सबका कोई हिसाब नहीं। प्लेटफॉर्म जब चाहें पे स्ट्रक्चर बदल देते हैं, जिससे वर्कर्स को पहले से पता ही नहीं होता कि कमाई कितनी होगी।”

पहले और अब की तुलना

एक डिलीवरी एजेंट ने बताया कि पहले प्रति ऑर्डर 20–25 रुपये मिलते थे और दूरी 2 किलोमीटर तक सीमित रहती थी। अब डिलीवरी 5 किलोमीटर तक भेजी जाती है।
वीकेंड इंसेंटिव भी बदले हैं—जहां पहले 25 डिलीवरी पर 450 रुपये मिलते थे, अब इसके लिए 34 डिलीवरी पूरी करनी होती हैं।

रेस्टोरेंट्स और ग्राहकों की चिंता

नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष प्रणव रुंगटा ने कहा कि वे Swiggy और Zomato के संपर्क में हैं। क्रिसमस पर खासकर गुरुग्राम में बिज़नेस प्रभावित हुआ था।
रेस्टोरेंट्स की सबसे बड़ी चिंता फूड वेस्टेज और ऑर्डर कैंसिलेशन को लेकर है।

कुछ ग्राहकों ने भी 25 दिसंबर के अनुभव से सबक लेते हुए मंगलवार को ही बल्क ऑर्डर कर दिए। हालांकि, रेस्टोरेंट्स मानते हैं कि बल्क ऑर्डर नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते।

हर कोई हड़ताल में नहीं

कई डिलीवरी पार्टनर्स ऐसे भी हैं जो हड़ताल में शामिल नहीं हो पा रहे। एक Swiggy वर्कर ने कहा, “हड़ताल से बहुत फर्क नहीं पड़ता। पगार का नुकसान और आईडी टर्मिनेट होने का डर रहता है।”

डिलीवरी पार्टनर्स के मुताबिक, 14–15 घंटे काम करने के बाद भी रोज़ की कमाई 700–800 रुपये के आसपास रहती है। पेट्रोल, खाना और किराया निकालने के बाद हाथ में सिर्फ 300–400 रुपये बचते हैं।

क्रिसमस की हड़ताल का अनुभव

कुछ वर्कर्स ने आरोप लगाया कि 25 दिसंबर की हड़ताल के दौरान दूसरों को शामिल होने के लिए कहने वालों को बाउंसर्स ने उठाया और सोशल मीडिया ग्रुप्स डिलीट कर दिए गए। इसी वजह से कई वर्कर्स आज की हड़ताल को लेकर भी असमंजस में हैं।

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