पहले पार्ट की सफलता के बाद ‘धुरंधर: द रिवेंज’ से उम्मीदें काफी ऊंची थीं। दर्शक एक और टाइट, सरप्राइज से भरी कहानी देखना चाहते थे। फिल्म कई जगह यह भरोसा बनाए रखती है, लेकिन पूरी तरह उसी स्तर पर नहीं पहुंच पाती।
रिलीज से पहले जिस तरह की एडवांस बुकिंग और उत्साह दिखा, उससे साफ था कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़े सिनेमाई अनुभव की उम्मीद बन चुकी थी। लेकिन देखने के बाद महसूस होता है कि फिल्म मजबूत शुरुआत और अंत के बावजूद बीच में ढीली पड़ जाती है।
कहानी: आगे बढ़ती है, लेकिन कसाव कम
फिल्म को छह हिस्सों में बांटा गया है और कहानी जसकीरत सिंह रांगी के सफर को आगे बढ़ाती है। परिवार के साथ हुए अन्याय से शुरू होकर उसका रास्ता उसे एक बड़े मिशन तक ले जाता है, जहां वह हमजा अली मजारी बनकर काम करता है।
पहले पार्ट की घटनाओं के बाद कहानी नए किरदारों और साजिशों के साथ आगे बढ़ती है। रहमान की मौत के बाद सत्ता और नियंत्रण की नई लड़ाई शुरू होती है। कहानी में कई परतें हैं, लेकिन उन्हें जिस तरह जोड़ा गया है, उसमें पहले जैसा कसाव महसूस नहीं होता। कई मोड़ पहले से अनुमानित लगते हैं।
अभिनय: रणवीर पर टिकी पूरी फिल्म
यह फिल्म काफी हद तक रणवीर सिंह के कंधों पर चलती है। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी लगातार बनी रहती है और वह अपने किरदार को गंभीरता से निभाते हैं। एक्शन, गुस्सा और इमोशन—तीनों में वह संतुलन बनाए रखते हैं।
- अर्जुन रामपाल को इस बार ज्यादा स्पेस मिला है, लेकिन उनका किरदार उतना असर नहीं छोड़ता
- संजय दत्त सीमित भूमिका में हैं
- सारा अर्जुन का रोल छोटा है
- आर माधवन जब भी आते हैं, फिल्म को थोड़ी मजबूती देते हैं
- राकेश बेदी क्लाइमैक्स में ध्यान खींचते हैं
निर्देशन: रिसर्च दिखती है, पर पकड़ ढीली
आदित्य धर ने इस दुनिया को विस्तार देने की कोशिश की है। कुछ वास्तविक घटनाओं और संदर्भों को जोड़ने से फिल्म का स्केल बड़ा लगता है।
लेकिन समस्या कहानी के ट्रीटमेंट में है। जहां पहले पार्ट में हर कुछ देर में नया मोड़ आता था, यहां ऐसा कम होता है। कई सीन लंबे खिंचते हैं और कहानी रफ्तार खो देती है।
फिल्म लगभग चार घंटे की है, और यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। एडिटिंग थोड़ी सख्त होती तो असर बेहतर हो सकता था।
संगीत: इस बार कमजोर कड़ी
गानों में पहले जैसा असर नहीं है। कुछ ट्रैक ठीक हैं, लेकिन कोई भी लंबे समय तक याद नहीं रहता। एक रोमांटिक गाना कहानी में स्वाभाविक नहीं लगता।
कुल मिलाकर: अनुभव ठीक, उम्मीदें ज्यादा
‘धुरंधर 2’ खराब फिल्म नहीं है। इसमें स्केल है, स्टार पावर है और कुछ मजबूत सीन्स भी हैं। लेकिन अगर इसे पहले पार्ट के बराबर तौला जाए, तो कमी साफ दिखती है।
यह फिल्म उन दर्शकों को ज्यादा पसंद आएगी जिन्होंने पहला पार्ट देखा है और कहानी को आगे जानना चाहते हैं। लेकिन अगर आप उसी तरह के सरप्राइज और कसावट की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो थोड़ी निराशा हो सकती है।
रेटिंग: 4/5


