डॉक्टरों की सलाह से ज्यादा एस्पिरिन ले रहे हैं ट्रंप, खुद इंटरव्यू में किया खुलासा

79 साल की उम्र में सेहत पर सवालों के बीच बोले अमेरिकी राष्ट्रपति—दिल के लिए “खून पतला रखना” चाहते हैं

Priyanka
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में अपनी सेहत और दवाइयों को लेकर बात की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेहत को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है। वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने खुद बताया कि वह रोज़ाना उतनी मात्रा में एस्पिरिन लेते हैं, जितनी उनके डॉक्टर आम तौर पर सलाह नहीं देते।

ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा, “वे कहते हैं कि एस्पिरिन खून को पतला करने के लिए अच्छी होती है और मैं नहीं चाहता कि मोटा खून मेरे दिल से गुजरे। मैं चाहता हूं कि खून अच्छे से, पतला होकर बहे। क्या यह समझ में आता है?”

79 वर्षीय ट्रंप अमेरिका के इतिहास में राष्ट्रपति पद संभालने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज व्यक्ति हैं। उनसे पहले यह रिकॉर्ड डेमोक्रेट नेता जो बाइडेन के नाम था, जो 82 वर्ष की उम्र में पद से हटे थे। बीते कुछ महीनों में ट्रंप की सेहत को लेकर सवाल इसलिए भी उठे हैं, क्योंकि सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके हाथों पर नीले निशान देखे गए थे और अक्टूबर में उनके मेडिकल स्कैन की खबरें सामने आई थीं।

मायो क्लिनिक के अनुसार, 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में रोज़ाना एस्पिरिन का सीमित इस्तेमाल दिल का दौरा या स्ट्रोक के खतरे को कम कर सकता है। आमतौर पर इसकी कम खुराक 81 मिलीग्राम मानी जाती है। हालांकि ट्रंप के निजी डॉक्टर सीन बारबाबेला ने अखबार को बताया कि राष्ट्रपति रोज़ाना 325 मिलीग्राम एस्पिरिन लेते हैं, जो कार्डियक प्रिवेंशन के लिए दी जा रही है।

व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप के हाथों पर दिखने वाले नीले निशान बार-बार लोगों से हाथ मिलाने की वजह से हैं। वहीं अक्टूबर में कराए गए स्कैन को भी एहतियाती बताया गया था। इस पर सफाई देते हुए ट्रंप और उनके डॉक्टर ने कहा कि दरअसल एमआरआई नहीं, बल्कि सीटी स्कैन कराया गया था।

डॉक्टर बारबाबेला के मुताबिक, शुरुआत में एमआरआई या सीटी स्कैन में से किसी एक पर विचार किया गया था, लेकिन बाद में सीटी स्कैन इसलिए चुना गया ताकि किसी भी हृदय संबंधी समस्या को पूरी तरह से खारिज किया जा सके। रिपोर्ट में किसी तरह की असामान्यता सामने नहीं आई।

ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी राजनीति में फिटनेस और पारदर्शिता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

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