पंजाब के पूर्व निदेशक जनरल ऑफ पुलिस (मानवाधिकार) मो. मुस्तफा और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक रज़िया सुल्ताना, उनके 35 वर्षीय पुत्र अक़ील अख़्तर की मौत को हत्या बताते हुए हरियाणा पुलिस द्वारा नामजद किए गए हैं। आरोपी दम्पति के अलावा बेटे की पत्नी व बहन समेत कुल सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है, जिसमें एसआईटी जांच भी शुरू हो गई है।
मुख्य तथ्य
- हरियाणा पुलिस ने अक़ील अख़्तर की मौत को हत्या व साज़िश का मामला मानते हुए पूर्व डीजीपी मो. मुस्तफा व उनकी पत्नी रज़िया सुल्ताना व अन्य पर एफआईआर दर्ज की है।
- आरोपी बोले– “हमारा बेटा पिछले 18 वर्षों से नशे का आदी था, बुप्रेनोर्फिन इंजेक्शन से ओवरडोज में उसकी मौत हुई।”
- अख़्तर ने वीडियो में अपने परिवार पर जान के खतरे व झूठी सज़ा का आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें फँसाया जा सकता है।
- एसआईटी गठित कर शव से विषैले पदार्थ की रिपोर्ट के लिए विसेरा सैंपल भेजा गया है, रिपोर्ट आने में 2-3 महीने का समय लग सकता है।
- मुस्तफा व सुल्ताना ने ‘राजनीतिक हाथ’ होने का दावा किया है और कहा है कि वे निष्पक्ष जांच के लिये तैयार हैं।
हरियाणा के पंचकूला जिले की पुलिस ने एक चौंकाने वाला मामला दर्ज किया है जिसमें पंजाब के पूर्व डीजीपी और उनकी पत्नी पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगा है। आरोपी दम्पति हैं मो. मुस्तफा और रज़िया सुल्ताना—दोनों ही पंजाब की राजनीति व प्रशासन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। मुस्तफा चार बार राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित हो चुके हैं, जबकि सुल्ताना ने मलेरकोटला से तीन बार विधायक का पद संभाला है।
घटना का केंद्र बिंदु है उनका बेटा, अकील अख्तर, उम्र 35 वर्ष। पंचकूला पुलिस के मुताबिक, 16 अक्टूबर को अकील का शव उसके निवास स्थान पर मिला था। आरंभिक पोस्टमार्टम के बाद परिवार ने शव ले लिया था, लेकिन बाद में सोशल मीडिया वीडियो और शिकायतों के बाद एक शिकायतकर्ता ने हत्या व साज़िश का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने एक वीडियो भी पेश किया जिसमे अकील ने साझा किया था कि वह “ख़तरों में है”, “परिवार उस पर झूठे आरोप लगाना चाहता है” और उन्हें डर है कि उनकी ज़िंदगी सुरक्षित नहीं है।
मुस्तफा ने अपनी ओर से यह दावा किया है कि उनका बेटा पिछले 18 साल से ड्रग्स का आदी था, मनोवैज्ञानिक विकार से ग्रस्त हो गया था और 16 अक्टूबर की रात बुप्रेनोर्फिन इंजेक्शन लगाकर ओवरडोज हो गया। उन्होंने कहा, “2007 से हमने उसे इलाज करवाया—PGIMER, चंडीगढ़ सहित—लेकिन बार-बार वह लौट आता था। उसे कभी-कभी आग लगाना, हमला करना और धमकी देना जैसी प्रवृत्तियाँ भी होती थीं।” उन्होंने आगे बताया कि अंकिल के कुछ वीडियो उन्होंने स्वयं देखे थे जिनमें वह hallucinations दिखा रहा था।
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) पंचकूला, श्रृष्टि गुप्ता के अनुसार, शुरुआत में हत्या की संभावना नहीं मानी गई थी। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो व परिवार के बयानों के बाद 20 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई जिसमें धारा 103(1)(हत्या) व 61(साज़िश) लगाई गई। इसके बाद ACP रैंक अधिकारी की निगरानी में एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित की गई है जो गहन और वैज्ञानिक जाँच करेगी।
परिवार ने इस मीडिया आक्रमण का विरोध किया है। मुस्तफा और सुल्ताना ने सार्वजनिक बयान दिए हैं कि कि यह मामला “नीची राजनीति” और “गंदे मंसूबों” का हिस्सा है। उन्होंने कहा है—“शिकायत सिर्फ दर्ज कराई गई है, इसका मतलब दोष सिद्ध नहीं हुआ है। हम निष्पक्ष जाँच के लिए तैयार हैं।”
हालाँकि शिकायतकर्ता ने कहा है कि उनका राजनीतिक कोई संबंध नहीं है, उन्होंने पारिवारिक मित्र-परिचित होने के नाते यह शिकायत दर्ज करवाई है क्योंकि उन्हें महसूस हुआ कि अकील के साथ “अन्याय” हुआ है।
वर्तमान में विसेरा सैंपलों व अन्य फॉरेंसिक जांचों के लिए प्रतीक्षा चल रही है, जो 2-3 महीनों में पूरी हो सकती हैं। अगर जाँच में साज़िश की पुष्टि होती है, तो यह मामला प्रशासन में बड़े पैमाने पर हलचल खड़ी कर सकता है क्योंकि इसमें सोशल व राजनीतिक प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हैं।


