22 सितंबर से लागू हुए GST 2.0 ने टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। रोटी-पराठा से लेकर एसी-फ्रिज तक, 375 से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स दरों में कटौती हुई है। सरकार का दावा है कि इससे घरों की जेब में बचत बढ़ेगी और उद्योगों को निवेश की नई गति मिलेगी।
मुख्य तथ्य
- नई दरें लागू: 5% और 18% की दो मुख्य दरें तय, साथ ही 40% डिमेरिट दर।
- उपभोक्ताओं को राहत: बीमा, होटल, सैलून और खाद्य वस्तुओं पर टैक्स घटा।
- महंगे सामान सस्ते: एसी, फ्रिज, बड़े टीवी अब 18% GST में शामिल।
- उद्योग को फायदा: आईडीएस (Inverted Duty Structure) की समस्या आंशिक रूप से सुलझी।
- सरकार की योजना: रिफंड और रिटर्न प्रक्रिया को डिजिटल और तेज़ बनाया जाएगा।
नई कर व्यवस्था की शुरुआत
GST 2.0 ने भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को और सरल और उपभोक्ता-हितैषी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘GST बचत उत्सव’ नाम दिया है, जिसके तहत बड़ी संख्या में वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स दरों में कटौती की गई है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों की जेब में अधिक पैसा बचेगा, जिससे खपत बढ़ेगी और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
कहाँ मिलेगी सबसे बड़ी राहत
नई दरों में रोज़मर्रा की चीज़ों जैसे रोटी, पराठा, खाखरा को पूरी तरह टैक्स से छूट दी गई है। वहीं स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर भी टैक्स नहीं लगेगा। आम जनता को राहत देने के लिए सैलून, स्पा और वेलनेस सेवाओं पर टैक्स को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और बड़े टीवी पर भी टैक्स दर 28% से घटाकर 18% की गई है।
उद्योग जगत के लिए बदलाव
सरकार ने इस बार न सिर्फ उपभोक्ताओं बल्कि उद्योगों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया है। वर्षों से चली आ रही इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (IDS) की समस्या से निपटने के लिए समान वस्तुओं को एक ही टैक्स दर में रखा गया है। हालांकि, साइकिल, उर्वरक और कुछ वस्त्र क्षेत्रों में IDS की चुनौती बनी हुई है। इसके बावजूद, टैक्स सरलीकरण और रिफंड प्रक्रिया में सुधार उद्योग जगत को राहत देंगे।
नया स्लैब ढांचा
GST 2.0 में पुराने 5%, 12%, 18% और 28% के चार स्लैब की जगह अब दो प्रमुख स्लैब बनाए गए हैं—5% (मेरिट रेट) और 18% (स्टैंडर्ड रेट)। इसके अलावा, पान मसाला, तंबाकू, एयरोप्लेन और यॉट जैसी ‘लक्ज़री और हानिकारक वस्तुओं’ के लिए 40% डिमेरिट रेट लागू किया गया है। इससे कर ढांचा अधिक पारदर्शी और आसान हो गया है।
उपभोक्ताओं के लिए सीधा फायदा
सरकार ने साफ कर दिया है कि कंपनियों को टैक्स कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुँचाना होगा। इसके लिए वित्त मंत्रालय ने 54 वस्तुओं और सेवाओं पर मासिक प्राइस-ट्रैकिंग शुरू की है। खाद्य उत्पादों से लेकर टूथपेस्ट, साबुन और शैक्षणिक सामग्री तक, उपभोक्ता आने वाले महीनों में वास्तविक बचत महसूस करेंगे।
भविष्य की दिशा
सरकार की अगली योजना GST रिटर्न और रिफंड प्रक्रिया को पूरी तरह स्वचालित करने की है। स्टार्टअप और छोटे व्यापारियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को तेज़ और आसान बनाने पर भी काम चल रहा है। निर्यातकों और IDS से प्रभावित उद्योगों के लिए रिफंड को 90% तक प्रोविजनल आधार पर मंज़ूर करने का निर्णय लिया गया है। इससे व्यापारियों की कार्यशील पूंजी पर दबाव कम होगा।


