केंद्र सरकार ने भारत को मेडिकल टूरिज्म, बायोफार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग और आयुर्वेद दवाओं के वैश्विक केंद्र के तौर पर स्थापित करने की दिशा में कई अहम कदमों की घोषणा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट पेश करते हुए कहा कि इसके लिए देशभर में पांच रीजनल मेडिकल हब बनाए जाएंगे और आयुष से जुड़ी सुविधाओं का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार एक नई योजना शुरू करेगी, जिसके तहत राज्यों को निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ इन रीजनल मेडिकल हब्स की स्थापना में सहयोग दिया जाएगा। इन हब्स को ऐसे एकीकृत हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां इलाज, मेडिकल शिक्षा और रिसर्च—तीनों एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
क्या होगा रीजनल मेडिकल हब्स में
सीतारमण के मुताबिक, इन हब्स में आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म फैसिलिटेशन सेंटर और जांच, इलाज के बाद देखभाल व रिहैबिलिटेशन से जुड़ा जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि डॉक्टरों और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
यह पहल सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को बढ़ावा देने और हेल्थ सेक्टर में हाई-स्किल नौकरियों के सृजन पर जोर दिया जा रहा है।
मेडिकल टूरिज्म को लेकर इंडस्ट्री की राय
नेशनल हेल्थकेयर फेडरेशन (Nathealth) की अध्यक्ष अमीरा शाह ने कहा कि पांच रीजनल मेडिकल वैल्यू टूरिज्म हब्स की घोषणा भारत को एक वैश्विक हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के तौर पर और मजबूत करेगी। उनके मुताबिक, इन हब्स में आयुष केंद्रों का एकीकरण भारत की समग्र और होलिस्टिक केयर क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने में मदद करेगा।
डॉ. अजय स्वरूप ने भी माना कि भारत मेडिकल टूरिज्म के लिए अच्छी स्थिति में है, लेकिन फिलहाल इस सेक्टर के लिए कोई औपचारिक सरकारी ढांचा नहीं है और यह काफी हद तक निजी खिलाड़ियों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार आधिकारिक तौर पर मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देती है, तो इससे वैश्विक पहचान के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी होगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इलाज की दरें तय की जानी चाहिए, ताकि नैतिक प्रथाओं को सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों का एक डेटाबेस बनाने की जरूरत बताई, जिससे यह समझा जा सके कि मरीज किस तरह के इलाज के लिए और किन क्षेत्रों से आ रहे हैं।
आयुष पर खास फोकस
वित्त मंत्री ने बजट में यह भी घोषणा की कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की तीन नई शाखाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा आयुष फार्मेसियों और ड्रग टेस्टिंग लैब्स को अपग्रेड किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात के जामनगर में स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को और मजबूत किया जाएगा, ताकि ट्रेडिशनल मेडिसिन से जुड़े एविडेंस-बेस्ड रिसर्च, ट्रेनिंग और जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।
सीतारमण के अनुसार, कोविड के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। गुणवत्ता वाले आयुर्वेद उत्पादों का निर्यात न सिर्फ किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि युवाओं के लिए प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग में अवसर भी पैदा करता है। बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए सरकार इस दिशा में और कदम उठा रही है।
आयुष को मुख्यधारा में लाने की कोशिश
आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा ने कहा कि ये कदम आयुष को भारत की मुख्य स्वास्थ्य, शिक्षा, रिसर्च और आर्थिक संरचना में मजबूती से शामिल करने की दिशा में निर्णायक साबित होंगे। उनके मुताबिक, संस्थागत विस्तार, गुणवत्ता नियंत्रण, वैश्विक रिसर्च सहयोग और वर्कफोर्स डेवलपमेंट के जरिए आयुष को एक संरचित और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी सेक्टर बनाया जा रहा है।
वहीं, नेशनल रिसर्च प्रोफेसर (आयुष) डॉ. भूषण पटवर्धन ने कहा कि ऐसे समय में जब नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के मामले बढ़ रहे हैं, बजट में आयुर्वेद और योग को मजबूत करने पर दिया गया जोर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अहम है।


