भारतीय मूल की महिला ने JD Vance से पूछा: “हम यहां से क्यों नहीं belong करते?”

मिसिसिपी विश्वविद्यालय में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस को भारतीय मूल की महिला ने कड़े सवालों से घेरा, कहा — "आपने हमें सपना दिखाया, अब क्यों कह रहे हैं कि हम यहां के नहीं?"

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भारतीय मूल की महिला ने JD वेंस से किया तीखा सवाल

अमेरिका की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब एक भारतीय मूल की महिला ने उपराष्ट्रपति JD वेंस को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान आव्रजन नीति (immigration policy) पर सवालों के घेरे में ले लिया। महिला ने वेंस से पूछा कि आखिर अमेरिकी प्रशासन अब उन लोगों को “यहां का नहीं” क्यों कह रहा है, जिन्होंने कानूनी रूप से वीज़ा लेकर, मेहनत और लगन से यहां अपना जीवन बनाया। यह तीखा संवाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

मुख्य तथ्य

  • मिसिसिपी विश्वविद्यालय में JD वेंस ने कहा कि अमेरिका को “कम कानूनी प्रवासियों” को स्वीकार करना चाहिए।
  • भारतीय मूल की महिला ने पूछा — “आपने हमें यहां आने का रास्ता दिया, अब कैसे कह सकते हैं कि हम belong नहीं करते?”
  • वेंस ने उत्तर में कहा कि “अनियंत्रित प्रवासन देश की सामाजिक एकता को तोड़ सकता है।”
  • महिला के सवाल पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाईं।
  • वेंस से उनकी हिंदू पत्नी पर भी सवाल पूछा गया, जिस पर उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की बात कही।

अमेरिका में आव्रजन (immigration) का मुद्दा एक बार फिर गर्म हो गया जब एक भारतीय मूल की महिला ने उपराष्ट्रपति JD वेंस को खुलकर चुनौती दी। मिसिसिपी विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महिला ने सवाल उठाया कि आखिर अमेरिकी प्रशासन ने कब तय किया कि “यहां बहुत ज़्यादा प्रवासी हैं”?

कार्यक्रम के दौरान वेंस ने कहा था कि अमेरिका को “कम कानूनी प्रवासियों” को ही स्वीकार करना चाहिए ताकि देश की “सामाजिक संरचना” सुरक्षित रह सके। इस पर महिला ने बीच में खड़े होकर कहा —

“जब आप कहते हैं कि यहां बहुत ज़्यादा प्रवासी हैं, तो यह संख्या आपने कब तय की? आपने हमें यहां आने का सपना दिखाया, हमारी जवानी और धन इस देश में लगवाया। अब आप कह रहे हैं कि हम belong नहीं करते?”

महिला के सवालों ने पूरे हॉल में सन्नाटा फैला दिया, जिसके बाद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका समर्थन किया।

महिला ने आगे कहा कि प्रशासन ने वर्षों तक विदेशी नागरिकों को अमेरिका में बसने और ‘अमेरिकन ड्रीम’ पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन अब वही सरकार सीमित आव्रजन की बात कर रही है। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा —

“आपने हमें कानूनी तौर पर आने का रास्ता दिखाया, हमारे पैसे लिए, और अब कह रहे हैं कि ‘हमारे जैसे बहुत हो गए’? यह कैसे न्यायसंगत है?”

JD वेंस ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “कोई परेशानी नहीं, हम बस चर्चा कर रहे हैं।” लेकिन उन्होंने महिला के मूल सवाल से बचते हुए कहा कि “अनियंत्रित प्रवासन देश की एकता और सामाजिक संतुलन को नुकसान पहुंचा सकता है।”

वेंस ने जोड़ा,

“अगर कुछ लोग अवैध रूप से आए और उन्होंने योगदान दिया, तो क्या इसका मतलब है कि हमें हर साल लाखों और लोगों को अंदर आने देना चाहिए? नहीं, ऐसा नहीं हो सकता।”

महिला ने फिर वेंस से उनके अंतरधार्मिक विवाह (interfaith marriage) पर सवाल किया — उनकी पत्नी हिंदू हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इस अनुभव ने उनके विचारों को प्रभावित किया है?

वेंस ने जवाब दिया,

“मैं एक ईसाई हूं और अपने धर्म में विश्वास रखता हूं। मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी भी इसे समझे, लेकिन अगर वह नहीं मानतीं तो भी कोई समस्या नहीं। भगवान ने सबको अपनी इच्छा से चुनने का अधिकार दिया है।”

इस संवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कई भारतीय-अमेरिकी नागरिकों ने महिला की हिम्मत की सराहना की है, इसे “सच्चे लोकतंत्र की आवाज़” बताया है। वहीं, कुछ लोगों ने JD वेंस के जवाबों को “राजनीतिक संतुलन” की कोशिश कहा है।

यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कानूनी प्रवासियों की संख्या घटाने और नागरिकता प्रक्रियाओं को सख्त करने के कदम उठाए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह नीति अमेरिका में बसे लाखों भारतीय मूल के परिवारों को प्रभावित कर सकती है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत से वहां पहचान बनाई है।

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