मध्य प्रदेश के इंदौर में भागीरथपुरा इलाके में हुई 14 मौतों को लेकर अब स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि इन मौतों की वजह दूषित पानी था। पानी के नमूनों में हैजा फैलाने वाला खतरनाक बैक्टीरिया भी पाया गया है।
महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और नर्मदा आपूर्ति शाखा की लैब रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में सप्लाई हो रहे पानी में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, क्लेबसेला और विब्रियो कोलेरी जैसे बैक्टीरिया मिले हैं। यही बैक्टीरिया तेज उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की पुष्टि
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने बताया कि जांच में यह साफ हो गया है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई। नगर निगम की ओर से अब तक 80 पानी के नमूनों की जांच कराई जा चुकी है और इनमें पानी को गंभीर रूप से दूषित करने वाले तत्व पाए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 8 दिनों में 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 71 को छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि 201 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 71 मरीज ICU में इलाजरत हैं।
ड्रेनेज का पानी पीने की लाइन में मिला
नगर निगम की जांच में सामने आया कि जिस मुख्य पाइपलाइन से इलाके में पानी की आपूर्ति होती थी, उसके ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। मुख्य लाइन के फूटने के कारण शौचालय का गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल गया और वही पानी घरों तक पहुंचता रहा। इलाके में कुछ और जगहों पर भी पाइपलाइन टूटी हुई पाई गई।
इस खुलासे के बाद भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा नदी के पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। फिलहाल टैंकरों के जरिए लोगों को पानी मुहैया कराया जा रहा है।
मुआवजे को लेकर विरोध
घटना के बाद नगरीय आवास और विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इलाके में पहुंचे थे। वह दोपहिया वाहन से आए और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा चेक देने की बात थी। लेकिन पीड़ित परिवारों ने चेक लेने से इनकार कर दिया।
महिलाओं ने सवाल उठाया कि पिछले दो साल से गंदा पानी आने की शिकायतें की जा रही थीं, फिर भी समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। विरोध बढ़ने पर मंत्री को मौके से लौटना पड़ा।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
मौतों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उल्टी-दस्त के इस प्रकोप को आपातकालीन स्थिति बताया है और कहा है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर शहरी इलाकों में पानी और सीवरेज व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है, जहां एक छोटी सी चूक भी बड़े जानलेवा संकट में बदल सकती है।


