इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में डायरिया से जुड़ी मौतों का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से बस्ती में लोग बीमार पड़ते रहे, अस्पताल पहुंचे, लेकिन इलाज पर ध्यान देने के बजाय मौतों के आंकड़े दबाने की कोशिश होती रही।
जमीनी हालात और आधिकारिक आंकड़ों के बीच साफ अंतर दिख रहा है। बस्ती में हफ्तेभर में आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने अब तक सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि डायरिया से होने के रूप में की है।
किन मौतों की हुई पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भागीरथपुरा की घटना में एक पुरुष और दो महिलाओं की मृत्यु डायरिया से हुई है। मृतकों की पहचान 70 वर्षीय नन्दलाल, 60 वर्षीय उर्मिला और 65 वर्षीय तारा कोरी के रूप में की गई है। विभाग का कहना है कि इन्हीं तीन मामलों में डायरिया से मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई है।
हालांकि, स्थानीय लोग और क्षेत्र के निवासी बताते हैं कि बीते सात दिनों में बस्ती में कुल आठ लोगों की जान गई है।
दूषित पानी से बिगड़े हालात
इलाके में रहने वाले लोगों का कहना है कि पेयजल के दूषित होने से बीमारी फैली। लोग उल्टी-दस्त और तेज बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते न तो बीमारी की व्यापक जांच कराई और न ही मौतों की सही जानकारी सामने आने दी।
#WATCH इंदौर, मध्य प्रदेश | इंदौर में दूषित पानी की वजह से तीन लोगों की मौत और करीब 149 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद, इंदौर के DM और नगर निगम कमिश्नर ने इलाके का दौरा किया।
नगर निगम घरों में पानी सप्लाई कर रहा है, और जिन लोगों में कोई लक्षण दिख रहे हैं, उनके लिए… pic.twitter.com/x4nCBcP9S7
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 31, 2025
मुख्यमंत्री का बयान और ऐलान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भागीरथपुरा की घटना को बेहद दुखद बताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पेयजल के दूषित या संक्रमित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर पर लगातार नजर रखी जाए। पीड़ितों को जरूरी दवाइयां, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं और सभी आवश्यक संसाधन तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन की सफाई
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उनके मुताबिक, स्वास्थ्य अमला पूरी तत्परता से उपचार में जुटा है और घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जा रही है।
सवाल जो अब भी बाकी हैं
एक तरफ प्रशासन इलाज और निगरानी की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती के लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर हालात पर समय रहते ध्यान दिया जाता, तो क्या जानें बचाई जा सकती थीं। आंकड़ों और हकीकत के बीच का यह फासला ही इस पूरे मामले की सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरा है।


